आतंकी फंडिंग मामले में यासीन मलिक की नहीं हुई पेशी, हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक से मांगा जवाब

आतंकी फंडिंग मामले में यासीन मलिक की नहीं हुई पेशी, हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कश्मीरी अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक के राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस अपील की सुनवाई के दौरान वर्चुअल रूप से पेश न होने पर तिहाड़ जेल अधीक्षक से रिपोर्ट तलब की, जिसमें उसके लिए फांसी की सजा की मांग की गई है।

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कश्मीरी अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक के राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस अपील की सुनवाई के दौरान वर्चुअल रूप से पेश न होने पर तिहाड़ जेल अधीक्षक से रिपोर्ट तलब की, जिसमें उसके लिए फांसी की सजा की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति नवीन चावला और अरुण भारद्वाज की खंडपीठ ने संबंधित जेल अधीक्षक को यासीन मलिक की गैरहाजिरी के कारणों की जानकारी देने वाली रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई में उसे वर्चुअल माध्यम से पेश किया जाए।

हाईकोर्ट ने कहा कि यासीन मलिक तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल नहीं हुआ। अदालत ने कहा, "इस संबंध में संबंधित जेल अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी जाए। अगली तारीख पर प्रतिवादी (यासीन मलिक) को वर्चुअल रूप से सुनवाई में शामिल कराया जाए।" न्यायमूर्ति चावला की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में तय की है।

एनआईए ने 2022 के उस निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आरोप स्वीकार करने के बाद यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

अपनी अपील में आतंकवाद निरोधक एजेंसी ने सजा बढ़ाकर मृत्युदंड देने की मांग की है। एजेंसी का तर्क है कि किसी आतंकी को केवल इसलिए उम्रकैद नहीं दी जा सकती क्योंकि उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और मुकदमे का सामना नहीं करने का विकल्प चुना।

एनआईए का कहना है कि इस आधार पर कम सजा देने से सजा संबंधी नीति कमजोर होगी और आतंकियों को अपराध स्वीकार कर फांसी से बचने का रास्ता मिल जाएगा।

निचली अदालत ने एनआईए की फांसी की मांग को खारिज करते हुए कहा था कि यासीन मलिक के अपराध "भारत की अवधारणा के मूल पर हमला" करने वाले थे और उनका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करना था।

हाल ही में एनआईए ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि यासीन मलिक के कई आतंकी संगठनों और प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के समर्थकों से संबंध थे।

एजेंसी ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं और नौकरशाहों के नामों का उल्लेख कर देने से एलईटी प्रमुख हाफिज सईद और अन्य आतंकियों से उसके संबंध खत्म नहीं हो जाते।

यासीन मलिक ने किसी वकील को नियुक्त करने के बजाय स्वयं अपना पक्ष रखने का फैसला किया है। अगस्त 2024 में अदालत द्वारा सुरक्षा कारणों से उसकी व्यक्तिगत पेशी पर रोक लगाने के बाद से वह तिहाड़ जेल से वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होता रहा है।

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Created On :   14 Oct 2026 4:24 PM IST

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