मैसूरु दशहरा विवाद को जातिगत रंग देना घटिया सोच जी. परमेश्वर
बेंगलुरु, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने गुरुवार को कहा कि मैसूरु दशहरा के दौरान नंदी ध्वज पूजा में तीन मंत्रियों को शामिल होने से रोके जाने की घटना को जातिगत रंग देना घटिया सोच है।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे और इस मुद्दे का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
जी. परमेश्वर ने बुधवार को जम्बू सवारी जुलूस के दौरान मैसूर पैलेस परिसर में हुई घटना पर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए पत्रकारों से कहा कि उन्होंने वीडियो देखा है और पुलिस अधिकारी ने मंत्रियों को बिना किसी मारपीट के रोक लिया था। उन्होंने कहा कि अधिकारी को पता था कि वे मंत्री हैं, लेकिन शायद उन्हें केवल मुख्यमंत्री को ही अंदर जाने देने का निर्देश दिया गया था।
उन्होंने पूछा, “यदि अधिकारी को मुख्यमंत्री के अलावा किसी और को अंदर न जाने देने का निर्देश है, तो वह दूसरों को अंदर नहीं जाने देगा। यह प्रोटोकॉल है। पुलिस द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने में क्या गलत है?”
जी. परमेश्वर ने मंत्रियों को बार-बार 'दलित मंत्री' कहे जाने पर आपत्ति जताई और पूछा कि उन्हें केवल मंत्री क्यों नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, “क्या उन्हें मंत्री कहना ही काफी नहीं है? ‘दलित मंत्री’ शब्द का प्रयोग क्यों? क्या आप अन्य मंत्रियों को उनकी जाति के नाम से संबोधित करेंगे? यह गलत है।”
उन्होंने स्वीकार किया कि भारतीय समाज में विभिन्न सामाजिक स्तर और श्रेणियां हैं, लेकिन कहा कि इनका इस्तेमाल विवाद पैदा करने के हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से हमारे समाज में वर्गीकरण है और विभिन्न स्तर हैं। इसे हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। यह सही नहीं है। दशहरा के दौरान होने वाली छोटी-मोटी घटनाओं को जातिगत रंग देना अनुचित है।”
उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद मुख्यमंत्री वापस लौट आए और मंत्रियों को अपने साथ ले गए। उन्होंने आगे कहा कि इस घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए।
इस बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मंत्रियों को नंदी ध्वज पूजा में भाग लेने दिया जाए और मुख्य सचिव वीडियो फुटेज की जांच करके घटना की पड़ताल करेंगे।
उन्होंने कहा, “मैसूरु जिला प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया अकेले सब कुछ नहीं कर सकते। इसी पृष्ठभूमि में मैंने सभी मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंपी थीं। वे सभी हमारे नेता हैं और मैंने यह सुनिश्चित किया कि उन्हें अंदर जाने दिया जाए। मुझे वापस जाकर उन्हें अंदर लाना पड़ा। मैं और क्या कर सकता था?”
डीके शिवकुमार ने कहा कि मुख्य सचिव शालिनी रजनीश वीडियो फुटेज की जांच करेंगी और घटना की छानबीन करेंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मैसूरु दशहरा समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और आयोजन की भव्यता को देखते हुए उन्होंने सभी मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंपी थीं।
बुधवार को नंदी ध्वजा पूजा के लिए मंत्रियों शिवराज तंगदगी, पीएम नरेंद्र स्वामी और केएस बसवंतप्पा को पुलिसकर्मियों द्वारा स्थल में प्रवेश करने से रोके जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। घटना के बाद मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप किया और पुलिस को निर्देश दिया कि मंत्रियों को पूजा में भाग लेने दिया जाए।
इस घटना ने राजनीतिक बहस छेड़ दी, जिसमें यह सवाल उठा कि पुलिस को प्रवेश प्रतिबंधित करने का निर्देश किसने दिया था और दलित संगठनों और प्रगतिशील समूहों ने मंत्रियों के साथ किए गए व्यवहार की आलोचना की।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को इस घटना की जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिसमें पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को मैसूर पैलेस परिसर में नंदी ध्वज पूजा में भाग लेने के लिए मंत्रियों को प्रवेश करने से रोका था।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने मंत्रियों को पूजा स्थल में प्रवेश करने से रोककर अहंकारपूर्ण व्यवहार किया।
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Created On :   22 Oct 2026 4:57 PM IST












