ई-जागृति को ई-गवर्नेंस के लिए मिला रजत पुरस्कार, उपभोक्ता को न्याय प्रदान करने में लाया बदलाव
नई दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। उपभोक्ता मामले विभाग के ई-जागरूकता प्लेटफॉर्म को प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में डिजिटल परिवर्तन के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग द्वारा सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन श्रेणी-I के अंतर्गत रजत पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह जानकारी सरकार की ओर से रविवार को दी गई।
सरकार की ओर से बताया गया कि ई-जागृति ने उपभोक्ता को न्याय प्रदान करने में बदलाव लाया है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से 2 लाख से अधिक मामले निपटाए गए हैं।
यह सम्मान केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों से प्राप्त 341 नामांकनों की गहन मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद प्राप्त हुआ है। यह प्रौद्योगिकी-आधारित, नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के माध्यम से उपभोक्ता शिकायत निवारण में ई-जागरूकता की भूमिका को दर्शाता है।
जनवरी 2025 को शुरू किया गया ई-जागृति प्लेटफॉर्म चार पुरानी प्रणालियों - ओसीएमएस, ई-दाखिल, एनसीडीआरसी सीएमएस और कॉन्फोनेट को एक एकल एआई-सक्षम, पेपरलेस प्लेटफॉर्म में एक करता है।
प्रारंभ होने के बाद से, इस प्लेटफॉर्म ने 2.29 लाख से अधिक उपभोक्ता मामलों को दर्ज करने और 2.07 लाख से अधिक मामलों को निपटाने में सहायता की है। इस प्रकार इस पोर्टल पर 90.75 प्रतिशत मामले निपटाने की दर दर्ज हुई है। साथ ही, यह उपभोक्ताओं को भारत और विदेश में कहीं से भी आसानी से न्याय प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उपभोक्ता आयोगों ने मजबूत प्रदर्शन को बनाए रखा। इस दौरान 1,65,456 मामले दर्ज किए गए, इसमें से 1,52,707 मामले निपटाए गए। निपटान दर वित्त वर्ष 2024-25 में 89.47 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 92.30 प्रतिशत हो गई।
वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) के दौरान भी उपभोक्ता आयोगों ने शानदार प्रदर्शन बनाए रखा, 38,944 दर्ज मामलों में से 34,600 मामलों का निपटारा किया। इस प्रकार 88.84 प्रतिशत की निपटान दर प्राप्त हुई। यह वित्त वर्ष 2024-25 की इसी तिमाही से अधिक है।
उपभोक्ता अब भारत या विदेश में कहीं से भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं, मामले की प्रगति को वास्तविक समय में ट्रैक कर सकते हैं और उपभोक्ता आयोगों में यात्रा किए बिना वर्चुअल सुनवाई में भाग ले सकते हैं।
इस प्लेटफॉर्म ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को भारत वापस आए बिना उपभोक्ता न्याय प्राप्त करने में सक्षम बनाया है।
पंजीकृत एनआरआई उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़कर 3,312 हो गई है।
इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक कुल 61 एनआरआई मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, एनसीडीआरसी के अलावा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश), मध्य प्रदेश, पंजाब, मेघालय, राजस्थान, कर्नाटक और अरुणाचल प्रदेश उन राज्यों में शामिल हैं जहां निपटारे की दर 100 प्रतिशत से अधिक रही है।
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Created On :   7 Jun 2026 6:04 PM IST












