ईसीआई ने बंगाल में 19 अपीलीय अधिकरण गठित किए
कोलकाता, 20 मार्च (आईएएनएस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी कर 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों के गठन की घोषणा की।
इन न्यायाधिकरणों का काम पश्चिम बंगाल में चल रहे 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) अभियान के दौरान, 'तार्किक विसंगति' श्रेणी में वर्गीकृत मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायिक अधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णयों पर प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई करना होगा। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में अगले महीने दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं।
नोटिफिकेशन में कहा गया है, "माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा वी.पी. (सिविल) नंबर 1089 ऑफ 2025 और अन्य मामलों में 10.03.2026 को पारित आदेश के पालन में, और कलकत्ता हाई कोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश पर, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) इसके द्वारा पश्चिम बंगाल राज्य की मतदाता सूची में संभावित मतदाताओं को शामिल करने या हटाने के संबंध में, नामित न्यायिक अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ अपील की सुनवाई के लिए निम्नलिखित अपीलीय न्यायाधिकरणों का गठन करता है।"
19 न्यायाधिकरणों में से 18 की अध्यक्षता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश करेंगे, जबकि एक की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश करेंगे।
कलकत्ता हाई कोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवांगम उस न्यायाधिकरण की अध्यक्षता करेंगे जो कोलकाता से जुड़े मामलों को देखेगा; इसमें कोलकाता के दो चुनावी जिले (दक्षिण और उत्तर), साथ ही कोलकाता से सटे उत्तर 24 परगना शामिल होंगे।
नोटिफिकेशन में आगे कहा गया है, "पूरक मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद, अपीलकर्ता इस नोटिफिकेशन के अनुसार नामित न्यायिक अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ अपील दायर कर सकते हैं।"
अपीलीय न्यायाधिकरणों में अपीलें या तो आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन, या जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या उप-विभागीय अधिकारी के कार्यालय में जाकर भौतिक रूप से दायर की जा सकती हैं; ये अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि अपील का डिजिटलीकरण किया जाए और उसे जल्द से जल्द ईसीआई एनईटी प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाए।
नोटिफिकेशन में यह भी जोड़ा गया, "यह नोटिफिकेशन तत्काल प्रभाव से लागू होगा, और संबंधित जिलों में सभी अपीलों का निपटारा हो जाने के तुरंत बाद उपर्युक्त न्यायाधिकरणों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।"
इन न्यायाधिकरणों का गठन चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाताओं को शामिल करने या हटाने से जुड़ी अपीलें अक्सर मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता निर्धारित करती हैं, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों में।
इस कदम से मतदाताओं को आश्वस्त करने और चुनावों से पहले लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनका विश्वास मजबूत करने की उम्मीद है।
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Created On :   20 March 2026 10:55 PM IST












