केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्वच्छता अभियान तेज, आधुनिक कचरा प्रबंधन से पर्यावरण संरक्षण पर जोर

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्वच्छता अभियान तेज, आधुनिक कचरा प्रबंधन से पर्यावरण संरक्षण पर जोर
जिला प्रशासन ने आधुनिक कचरा प्रबंधन प्रणालियां लगाकर केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर पर्यावरण-अनुकूल और स्वच्छता उपायों को तेज कर दिया है।

केदारनाथ, 6 मई (आईएएनएस)। जिला प्रशासन ने आधुनिक कचरा प्रबंधन प्रणालियां लगाकर केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर पर्यावरण-अनुकूल और स्वच्छता उपायों को तेज कर दिया है।

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने तीर्थयात्रियों से इन स्वच्छता प्रयासों में सक्रिय रूप से सहयोग करने का आग्रह किया है। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है कि श्री केदारनाथ धाम की तीर्थयात्रा स्वच्छ, हरित और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ बनी रहे। ट्रेकिंग मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देते हुए, व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

केदारनाथ नगर पंचायत सूखे कचरे का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करने के लिए एक आधुनिक बेलिंग मशीन का उपयोग कर रही है। यह मशीन कचरे को दबाकर ठोस गठ्ठरों में बदल देती है, जिससे इसका परिवहन और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) आसान और सुरक्षित हो जाता है।

कार्यकारी अधिकारी नीरज कुकरेती ने बताया कि धाम में एक 'मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी' (एमआरएफ) केंद्र स्थापित किया गया है, जहां सूखे कचरे को व्यवस्थित रूप से एकत्र किया जाता है, अलग किया जाता है और पुनर्चक्रित किया जाता है। अब तक, लगभग 500 किलोग्राम सूखे कचरे को बेलों में बदला जा चुका है, जिससे 15,000 से 20,000 रुपए का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि मंदिर परिसर और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। केदारनाथ की ओर जाने वाले पूरे तीर्थयात्रा मार्ग पर स्वच्छता संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से यह भी अपील की कि वे कचरा न फैलाकर और पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं का समर्थन करके सहयोग करें।

इस बीच, चार धाम यात्रा में इस मौसम में भारी भीड़ देखने को मिली है, अब तक 6,60,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने अपनी तीर्थयात्रा पूरी कर ली है।

उत्तराखंड का चार धाम भारतीय हिमालय में स्थित सबसे पवित्र हिंदू तीर्थस्थलों में से एक है, जो गढ़वाल क्षेत्र में पड़ता है।

इस तीर्थ परिपथ में चार पवित्र मंदिर यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ शामिल हैं। इन स्थलों का अत्यंत धार्मिक महत्व है। केदारनाथ भगवान शिव को समर्पित है और बद्रीनाथ भगवान विष्णु को, जबकि यमुनोत्री और गंगोत्री का संबंध पवित्र नदियों यमुना और गंगा से है, जिन्हें देवी के रूप में पूजा जाता है।

परंपरागत रूप से, चार धाम यात्रा पश्चिम से पूर्व की ओर की जाती है। इसकी शुरुआत यमुनोत्री से होती है, उसके बाद गंगोत्री, और फिर केदारनाथ तथा बद्रीनाथ की यात्रा की जाती है।

8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने हिंदू आध्यात्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए इस तीर्थयात्रा को लोकप्रिय बनाया था। आज भी, यह दुनिया भर से हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है, और उन्हें एक गहरा आध्यात्मिक तथा समृद्ध अनुभव प्रदान करती है।

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Created On :   6 May 2026 6:04 PM IST

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