इंदौर बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी की कार्रवाई, 3.91 करोड़ रुपए की जमीन अटैच

इंदौर बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी की कार्रवाई, 3.91 करोड़ रुपए की जमीन अटैच
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 307.44 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए इंदौर के हुक्माखेड़ी गांव स्थित लगभग 3.91 करोड़ रुपए मूल्य की तीन वाणिज्यिक भूमि परिसंपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।

इंदौर, 11 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 307.44 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए इंदौर के हुक्माखेड़ी गांव स्थित लगभग 3.91 करोड़ रुपए मूल्य की तीन वाणिज्यिक भूमि परिसंपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।

ईडी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। अटैच की गई संपत्तियां एम/एस विश्वकर्मा क्रिएशंस प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं और इनका संबंध नियो कॉर्प इंटरनेशनल लिमिटेड (एनसीआईएल) तथा उससे जुड़ी कंपनियों से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले से है।

एजेंसी ने बताया कि अस्थायी कुर्की आदेश 10 सितंबर 2026 को जारी किया गया था।

ईडी के मुताबिक, जांच में पाया गया कि संबंधित कंपनी को बैंक धोखाधड़ी से अर्जित अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) प्राप्त हुई थी। इस कथित धोखाधड़ी से सरकारी क्षेत्र के बैंकों को कुल 307.44 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ईडी की जांच दो अलग-अलग एफआईआर के आधार पर शुरू हुई।

पहली एफआईआर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के भोपाल स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उत्कर्ष त्रिवेदी और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज की थी। इसमें पंजाब नेशनल बैंक को कथित रूप से 57.47 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था।

दूसरी एफआईआर सीबीआई की मुंबई स्थित आर्थिक अपराध शाखा ने नियो कॉर्प इंटरनेशनल लिमिटेड, उसके निदेशकों सुनील कुमार त्रिवेदी, उत्कर्ष त्रिवेदी और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज की थी। आरोप है कि उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को 249.97 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया।

ईडी जांच में सामने आया कि एनसीआईएल और उससे संबंधित कंपनियों के ऋण खातों से निकाली गई बड़ी रकम को सुनील कुमार त्रिवेदी और उत्कर्ष त्रिवेदी द्वारा नियंत्रित विभिन्न मध्यस्थ कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया।

एजेंसी के अनुसार, धनराशि को कई स्तरों पर स्थानांतरित और छिपाने के बाद विश्वकर्मा क्रिएशंस प्राइवेट लिमिटेड तक पहुंचाया गया। बाद में कंपनी ने इन रकमों का उपयोग किया या उन्हें अन्य माध्यमों से खर्च कर दिया।

जांच में यह भी पाया गया कि विश्वकर्मा क्रिएशंस के नाम दर्ज भूमि संपत्तियां कथित अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थीं। ईडी ने बताया कि संपत्तियों के आगे हस्तांतरण या बिक्री को रोकने के लिए यह अटैचमेंट की गई है।

इस मामले में इससे पहले भी एजेंसी ने ब्रिटेन के मिडिलसेक्स के फेल्थम स्थित 24 सिग्नेट एवेन्यू में मौजूद करीब 2.45 लाख पाउंड (लगभग 2.08 करोड़ रुपए) मूल्य की एक अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच किया था।

अधिकारियों के अनुसार, अपराध से अर्जित धन की पूरी श्रृंखला का पता लगाने और उसकी वसूली के प्रयासों के तहत यह कार्रवाई की गई है।

ईडी ने कहा कि मामले में शामिल कंपनियों और व्यक्तियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।

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Created On :   11 Sept 2026 11:39 PM IST

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