एफसीआरए बिल अगले हफ्ते लोकसभा में पेश होने की संभावना, विपक्ष ने कहा-ठप हो जाएगा एनजीओ का काम

एफसीआरए बिल अगले हफ्ते लोकसभा में पेश होने की संभावना, विपक्ष ने कहा-ठप हो जाएगा एनजीओ का काम
विपक्षी दलों ने शनिवार को केंद्र सरकार द्वारा संसद के चल रहे मानसून सत्र के दौरान अगले हफ्ते 'विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम संशोधन विधेयक (एफसीआरए बिल)' पेश किए जाने की संभावना पर कड़ा विरोध जताया। उनका दावा है कि इससे एनजीओ का काम ठप हो जाएगा।

नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। विपक्षी दलों ने शनिवार को केंद्र सरकार द्वारा संसद के चल रहे मानसून सत्र के दौरान अगले हफ्ते 'विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम संशोधन विधेयक (एफसीआरए बिल)' पेश किए जाने की संभावना पर कड़ा विरोध जताया। उनका दावा है कि इससे एनजीओ का काम ठप हो जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, यह बिल लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है।

आईएएनएस से बात करते हुए सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने कहा, ''कई एनजीओ और सिविल सोसाइटी संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है कि उनके काम पर असर पड़ेगा और उनका काम ठप हो जाएगा। सरकार यही करने की कोशिश कर रही है।"

उन्होंने कहा, "देखते हैं कि बिल क्या है और सरकार का जवाब क्या होगा।"

सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने भी आरोप लगाया कि एफसीआरए बिल उन पुराने एनजीओ को निशाना बना रहा है जो लोगों के लिए काम कर रहे हैं।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, "वे (केंद्र) सिर्फ आरएसएस के हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। आरएसएस के हजारों संगठन अलग-अलग तरीकों से करोड़ों रुपए पा रहे हैं, लेकिन सरकार उन सभी अन्य संगठनों को नियंत्रित करना चाहती है जो उनकी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ खड़े हैं या जो इस सरकार की देशविरोधी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं। इसलिए वे यह बिल ला रहे हैं।"

शिवदासन ने आगे कहा कि सीपीआई(एम) इस बिल के खिलाफ सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने की पहल करेगा।

एनसीपी-एसपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने भी इसी तरह के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एफसीआरए बिल लाने के पीछे का उद्देश्य यह है कि केंद्र सरकार देश में ईसाई और मुस्लिम समुदायों द्वारा किए जा रहे दान-धर्म के कामों को नियंत्रित करना चाहती है"।

उन्होंने कहा, "हम बिल के खिलाफ हैं, क्योंकि यह पैसा देश के विकास में खर्च हो रहा है, जिसमें शिक्षा भी शामिल है। अगर मुस्लिम समुदाय के लोगों को यहां बच्चों की शिक्षा के लिए विदेश से पैसा मिलता है, तो सरकार को उस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।"

वाईएसआरसीपी सांसद गोला बाबू राव ने कहा कि असली विदेशी फंड लेने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उनकी राय है कि यह जांचने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी होना उपयोगी रहेगा कि ऐसे फंड का गलत इस्तेमाल न हो।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, "मुझे लगता है कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को आशंका है कि इन फंडों का देश में गलत इस्तेमाल होगा और इन्हें गलत नीयत से भेजा जा सकता है। हालांकि एक सामान्य परिवार से आने और पढ़ा-लिखा होने के नाते मुझे लगता है कि विदेश से फंड लेने में कोई बुराई नहीं है। साथ ही एक केंद्रीय एजेंसी भी होनी चाहिए जो जांच सके कि फंड का गलत इस्तेमाल न हो।"

उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, असली उद्देश्यों के लिए मिलने वाले फंड का स्वागत किया जाना चाहिए।"

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   1 Aug 2026 7:18 PM IST

Tags

Next Story