1951 से 2026 तक असम, बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में वोटर्स बढ़े, मतदान प्रतिशत में भी वृद्धि

1951 से 2026 तक असम, बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में वोटर्स बढ़े, मतदान प्रतिशत में भी वृद्धि
भारत निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की चुनावी यात्रा का विस्तृत डेटा जारी किया है। इसमें आजादी के बाद हुए पहले आम और विधानसभा चुनावों से लेकर अप्रैल और मई 2026 में हुए विधानसभा चुनावों तक का पूरा ब्योरा शामिल है।

नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। भारत निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की चुनावी यात्रा का विस्तृत डेटा जारी किया है। इसमें आजादी के बाद हुए पहले आम और विधानसभा चुनावों से लेकर अप्रैल और मई 2026 में हुए विधानसभा चुनावों तक का पूरा ब्योरा शामिल है।

ये आंकड़े दशकों के दौरान मतदाताओं की संख्या में हुई भारी बढ़ोतरी को दिखाते हैं। साथ ही, इन क्षेत्रों में मतदान में लगातार ऊंची भागीदारी को भी उजागर करते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 'चुनाव का पर्व, मतदाता का गर्व' थीम के तहत ये आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों से यह पता चलता है कि इन चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में मतदाताओं की संख्या दशकों के दौरान कई गुना बढ़ गई है, जबकि मतदान में भागीदारी देश में सबसे ऊंची दरों में से एक बनी हुई है।

सभी राज्यों में पश्चिम बंगाल ने विधानसभा चुनावों में 93.71 प्रतिशत के साथ सबसे ज्यादा वोटिंग प्रतिशत दर्ज किया है, जो आजादी के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा है। राज्य में चुनावी भागीदारी का ग्राफ आजादी के बाद के शुरुआती दशकों से लगातार ऊपर चढ़ता हुआ दिखता है।

1950 के दशक में जब वोटिंग 50 प्रतिशत से कम रहती थी। वहीं, 1970 के दशक के आखिर से लोकसभा और विधानसभा चुनावों में यह लगातार 75 प्रतिशत के आंकड़े को पार करती रही है। राज्य में वोटरों की संख्या 1951 के लगभग 76 लाख से बढ़कर 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले 6.38 करोड़ से भी ज्यादा हो गई है।

असम में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में भागीदारी में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। मतदान का आंकड़ा 86.33 प्रतिशत है। राज्य में मतदाताओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।

1951 में जहां लगभग 24 लाख मतदाता थे, वहीं 2026 तक यह संख्या बढ़कर 2.16 करोड़ से ज्यादा हो गई है। हालांकि, आयोग ने 1983 के विधानसभा चुनावों में मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट की ओर भी इशारा किया है। ये चुनाव उस समय हुए थे जब राज्य में हिंसा अपने चरम पर थी। उस समय मतदान लगभग 32 प्रतिशत था।

कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान बहुत ही कम हुआ था, जिसके चलते 1983 का चुनाव असम के इतिहास के सबसे अशांत में से एक बन गया।

तमिलनाडु में, आयोग द्वारा दिखाए गए ताजा रुझानों के अनुसार, मतदान में भागीदारी 86.03 प्रतिशत तक पहुंच गई है। राज्य के मतदाताओं की संख्या 1967 के चुनावों में लगभग 1.59 करोड़ से बढ़कर 2026 के चुनावों तक लगभग 4.94 करोड़ हो गई है। मतदान का यह ग्राफ लगातार हुए चुनावों में स्थिर और उच्च जनभागीदारी को दर्शाता है, विशेष रूप से 1970 के दशक के बाद से।

केरल में 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में मतदान का ताजा आंकड़ा 79.53 प्रतिशत दर्ज किया गया। राज्य ने 1957 में लगभग 58 लाख मतदाताओं के साथ अपनी चुनावी यात्रा शुरू की थी। अब यह आंकड़ा 2.16 करोड़ मतदाताओं को पार कर चुका है।

केरल में मतदान का प्रतिशत दशकों से ज्यादातर 70 और 80 के दशक के उच्च स्तर पर ही बना रहा है, जो मतदाताओं की लगातार सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी 91.19 प्रतिशत मतदान के साथ एक और बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र के रूप में उभरा है। 1964 में 1.71 लाख से कुछ ज्यादा मतदाताओं से बढ़कर 2026 तक मतदाताओं की संख्या लगभग 8.67 लाख हो गई है। आकार में छोटा होने के बावजूद, पुडुचेरी ने विधानसभा चुनावों में लगातार जोरदार भागीदारी दर्ज की है।

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Created On :   15 May 2026 4:37 PM IST

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