आईएनएस दुनागिरि से लेकर संशोधक तक, इस सप्ताह कोलकाता में भारतीय नौसेना को मिलेंगे तीन नए युद्धपोत

आईएनएस दुनागिरि से लेकर संशोधक तक, इस सप्ताह कोलकाता में भारतीय नौसेना को मिलेंगे तीन नए युद्धपोत
भारतीय नौसेना इस सप्ताह कोलकाता में एक साथ तीन नए युद्धपोतों- आईएनएस दुनागिरि, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक को कमीशन करने जा रही है। इसे देश के नौसैनिक आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना इस सप्ताह कोलकाता में एक साथ तीन नए युद्धपोतों- आईएनएस दुनागिरि, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक को कमीशन करने जा रही है। इसे देश के नौसैनिक आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस समारोह में केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के शामिल होने की संभावना है और इसका आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित कोलकाता यात्रा के दौरान किया जा सकता है।

हाल के वर्षों में यह दूसरा अवसर होगा, जब भारतीय नौसेना एक साथ तीन अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक प्लेटफॉर्म को कमीशन करेगी। इससे पहले जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई नौसैनिक डॉकयार्ड में विध्वंसक आईएनएस सूरत, फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरि और पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर को एक साथ नौसेना में शामिल किया था।

आईएनएस दुनागिरि प्रोजेक्ट-17ए के तहत बनने वाला पांचवां फ्रिगेट और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा निर्मित अपनी श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और क्लोज-इन वेपन सिस्टम से लैस है। इसमें कंबाइंड डीजल ऑर गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन प्रणाली और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं।

इस युद्धपोत का निर्माण 80 महीनों में पूरा किया गया, जबकि इसी श्रेणी के पहले पोत आईएनएस नीलगिरि के निर्माण में 93 महीने लगे थे। प्रोजेक्ट-17ए के तहत आईएनएस महेंद्रगिरि और आईएनएस विंध्यगिरि का कमीशन होना अभी बाकी है।

आईएनएस अग्रय 16 पोतों वाले अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) कार्यक्रम का पांचवां पोत है, जिसे वर्ष 2013 में मंजूरी दी गई थी। तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में संचालन के लिए तैयार इस पोत में हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार प्रणाली लगी है।

यह पोत विशेष रूप से उथले समुद्री इलाकों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। पाकिस्तान नौसेना द्वारा हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों को शामिल कर अपनी पनडुब्बी क्षमता बढ़ाने की कोशिशों के बीच इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।

आईएनएस संशोधक संध्यायक श्रेणी के सर्वेक्षण पोत कार्यक्रम का चौथा और अंतिम जहाज है। लगभग 110 मीटर लंबे और 3,300 टन वजनी इस पोत में ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल (एयूवी), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) और समुद्र तल की मैपिंग एवं नौवहन चार्ट तैयार करने वाली आधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण प्रणालियां लगी हैं।

इन तीनों युद्धपोतों के नौसेना में शामिल होने से भारतीय नौसेना की सतही युद्ध क्षमता, पनडुब्बी रोधी अभियान और समुद्री सर्वेक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही भारत की समुद्री सुरक्षा और परिचालन तैयारियों को भी नई मजबूती मिलेगी।

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Created On :   17 Jun 2026 2:39 PM IST

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