अमेरिका में हिंदूफोबिया के खिलाफ प्रस्ताव को मिल रहा समर्थन

अमेरिका में हिंदूफोबिया के खिलाफ प्रस्ताव को मिल रहा समर्थन
अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में हिंदूफोबिया और हिंदू-विरोधी कट्टरता की निंदा करने वाला एक प्रस्ताव जोर पकड़ रहा है। 400 से ज्यादा समुदाय के सदस्यों ने इस कदम का समर्थन किया है और कानून बनाने वाले हिंदू अमेरिकियों को निशाना बनाने वाली बढ़ती घटनाओं पर गवाहों के बयान सुन रहे हैं।

वाशिंगटन, 18 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में हिंदूफोबिया और हिंदू-विरोधी कट्टरता की निंदा करने वाला एक प्रस्ताव जोर पकड़ रहा है। 400 से ज्यादा समुदाय के सदस्यों ने इस कदम का समर्थन किया है और कानून बनाने वाले हिंदू अमेरिकियों को निशाना बनाने वाली बढ़ती घटनाओं पर गवाहों के बयान सुन रहे हैं।

मिनेसोटा सीनेट में 9 मार्च को पेश किए गए इस प्रस्ताव का मकसद हिंदू अमेरिकियों के साथ होने वाले भेदभाव को औपचारिक रूप से मान्यता देना और धार्मिक स्वतंत्रता, बहुलवाद व आपसी सम्मान के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दोहराना है।

'कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका' (सीओएचएनए), जिसने इस मुहिम की अगुवाई की है, ने कहा कि यह पहल मान्यता और सुरक्षा हासिल करने के लिए हिंदू समुदाय के लगातार प्रयासों को दर्शाती है।

समुदाय के नेताओं ने मिनेसोटा सीनेट की न्यायपालिका और सार्वजनिक सुरक्षा समिति के सामने गवाही दी और राज्य व देशभर में सामने आई घटनाओं का जिक्र किया।

इनमें एदिना में एक मंदिर को निशाना बनाकर की गई नफरती बयानबाजी, मेपल ग्रोव में पुजारियों के घरों में हुई चोरियां और अतीत में हिंदू संस्थानों पर हुए तोड़फोड़ और डराने-धमकाने के मामले शामिल थे।

सीओएचएनए के मिनेसोटा चैप्टर की निदेशक नेहा मरकंडा ने समिति से कहा, "जिस नफरत का कोई नाम नहीं होता, उसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

मिनेसोटा के कानून बनाने वालों से संस्थागत मान्यता मिलना इसलिए बहुत जरूरी है ताकि व्यापक समुदाय को यह भरोसा दिलाया जा सके कि उनके दर्द को देखा जा रहा है और यह कि हम सब मिलकर हर मिनेसोटावासी की सुरक्षा और गरिमा के वादे को पूरा करेंगे।"

हिंदू समुदाय के सदस्यों द्वारा सौंपे गए एक पत्र में कानून बनाने वालों से इस प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की गई।

एक मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार, कुछ ही दिनों के भीतर 400 से ज्यादा मिनेसोटावासियों द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में हिंदूफोबिया के बारे में ज्यादा जागरूकता फैलाने, नफरती घटनाओं की रिपोर्टिंग के बेहतर तंत्र बनाने, और भेदभाव-विरोधी व विविधता से जुड़ी पहलों में हिंदू समुदायों को ज्यादा मजबूती से शामिल करने की मांग की गई है।

इस प्रयास को अन्य धार्मिक समूहों से भी समर्थन मिला है। 'यहूदी समुदाय संबंध परिषद' के उप-कार्यकारी निदेशक एथन रॉबर्ट्स ने कानून बनाने वालों से कहा कि धार्मिक नफरत का सामना करने के लिए उसे स्पष्ट रूप से स्वीकार करना जरूरी है।

उन्होंने कहा, "हिंदू समुदाय को साफ तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। यहूदी होने के नाते हम जानते हैं कि जब नफरत को कम करके आंका जाता है, खारिज कर दिया जाता है। उसका कोई नाम नहीं दिया जाता, तो कितना बड़ा खतरा पैदा हो जाता है और इसीलिए यह प्रस्ताव इतना अहम है।"

सीओएचएनए के सदस्यों ने कहा कि इस तरह की गवाहियां इस बात को उजागर करती हैं कि इस कदम के पीछे एक व्यापक गठबंधन का समर्थन है और यह भी कि हिंदू-विरोधी पूर्वाग्रह को भी उतनी ही गंभीरता से पहचानने की जरूरत है, जितनी कि नफरत के अन्य रूपों को।

समर्थकों ने व्यापक रुझानों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने देशभर में हुई घटनाओं का जिक्र किया, जिनमें मंदिरों में हुई गोलीबारी, हमले और ऑनलाइन नफरती अभियान शामिल हैं।

2022 की रटगर्स यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर हिंदू-विरोधी गलत जानकारी और उत्पीड़न को दर्ज किया गया और असल जिंदगी में हिंसा की संभावना के प्रति आगाह किया गया।

सीओएचएनए ने बताया कि उसकी मिनेसोटा शाखा सांसदों, समुदाय के सदस्यों और स्थानीय हितधारकों के साथ मिलकर डेटा उपलब्ध कराने और हिंदू अमेरिकियों की चिंताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम कर रही है।

सीओएचएनए ने कहा कि हिंदू अमेरिकियों ने लंबे समय से मिनेसोटा और संयुक्त राज्य अमेरिका के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक ताने-बाने में योगदान दिया है। समर्थकों ने कहा कि यह सुनिश्चित करना कि वे बिना किसी डर के आजादी से अपने धर्म का पालन कर सकें, समानता और आपसी सम्मान के मूल्यों को बनाए रखने के लिए जरूरी है।

संगठन ने कहा कि वह इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और धार्मिक भेदभाव का मुकाबला करने के व्यापक प्रयासों के लिए सांसदों, समुदाय के नेताओं और विभिन्न धर्मों के भागीदारों के साथ काम करना जारी रखेगा।

हाल के वर्षों में, अमेरिकी राज्यों ने नफरत भरे अपराधों और धार्मिक पक्षपात से निपटने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं, क्योंकि अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने वाली घटनाओं ने सबका ध्यान खींचा है।

कई विधानसभाओं ने व्यापक विविधता ढांचों के भीतर भेदभाव के विशिष्ट रूपों को मान्यता देने वाले उपायों पर विचार किया है।

मिनेसोटा में भारतीय मूल की आबादी बढ़ रही है और प्रवासी समूहों की ओर से नागरिक भागीदारी में बढ़ोतरी देखी गई है। इसमें वकालत करने वाले संगठन समावेश, नागरिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर नीतिगत चर्चाओं में ज्यादा अहम भूमिका निभा रहे हैं।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   18 March 2026 10:52 AM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story