आईडीएफसी बैंक मामला सीबीआई ने आईएफएस अधिकारी और उसकी पत्नी के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट
चंडीगढ़, 11 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को एक इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (आईएफएस) अधिकारी, जो चंडीगढ़ की ग्रीन एनर्जी सोसाइटी क्रेस्ट के तत्कालीन सीईओ थे, उनकी पत्नी और उस कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जिसमें वह डायरेक्टर के तौर पर काम करती थीं।
यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक अकाउंट्स से 75 करोड़ रुपए की सरकारी राशि के गबन से जुड़ा है। इसको लेकर सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) के तत्कालीन प्रमुख और फॉरेस्ट सर्विस ऑफिसर नवनीत श्रीवास्तव (जो पहले से ही ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं), विपम कंसल्टेंसी और उसके डायरेक्टर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
सीबीआई ने कहा कि आरोपियों पर बीएनएस के तहत आपराधिक साजिश, सबूत मिटाने, धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी और नकली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही उन पर 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 2018' के तहत रिश्वतखोरी, आपराधिक कदाचार और अपराध में मदद के आरोप भी हैं।
बयान में कहा गया है कि सीबीआई की जांच से पता चला है कि क्रेस्ट के सीईओ के तौर पर काम करते हुए श्रीवास्तव ने दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची, राशि का गलत इस्तेमाल किया और एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर आपराधिक कदाचार करते हुए गैर-कानूनी तरीके से पैसे लिए।
उनकी पत्नी, जो विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर हैं और कंपनी को भी अपराध में मदद करने और आपराधिक साजिश का हिस्सा होने के लिए चार्जशीट किया गया है।
सीबीआई ने बताया कि इस कंपनी को धोखाधड़ी से हासिल रकम में से 95 लाख रुपए मिले और उसने इस पैसे का इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने में किया। सीबीआई ने कहा कि क्रेस्ट मामले में कुल धोखाधड़ी 75.4 करोड़ रुपए की है।
एजेंसी ने बताया कि श्रीवास्तव को पहले ही इस मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था और वह अभी भी ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। सीबीआई ने यह मामला चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश की जांच एजेंसियों से अपने हाथ में लिया था।
बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को दाखिल चार्जशीट से पहले इस मामले में 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
सीबीआई ने बताया कि ये मामले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, चंडीगढ़ की सेक्टर-32 ब्रांच में हुए बड़े बैंकिंग फ्रॉड से जुड़े हैं। इस फ्रॉड में हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संगठनों के लगभग 504 करोड़ रुपए की सरकारी राशि को नकली और फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजेक्शन के जरिए निकाल लिया गया था।
सीबीआई ने राज्य सरकार के अनुरोध पर हरियाणा वाला मामला स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो से अपने हाथ में लिया था।
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Created On :   11 Sept 2026 6:13 PM IST












