खाड़ी संकट के बीच भारत ने सक्रिय नीतिगत निर्णयों और निरंतर राजनयिक प्रयासों के माध्यम से उपभोक्ताओं को बचाया पूर्व वरिष्ठ अधिकारी
कोलकाता, 30 जून (आईएएनएस)। भारत ने सक्रिय नीतिगत निर्णयों, रणनीतिक अवसंरचना विस्तार और निरंतर राजनयिक प्रयासों के माध्यम से खाड़ी संकट के प्रभाव से उपभोक्ताओं को सफलतापूर्वक बचाया, जिससे निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित हुई। यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पूर्व सचिव विवेक कुमार की ओर से मंगलवार को दी गई।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कुमार ने कहा कि भारत ने मध्य पूर्व संकट का सामना कई अन्य देशों के मुकाबले बेहतर ढंग से किया।
पड़ोसी देश से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि संकट के 24 घंटे के भीतर ही भारत ने 'वर्क-फ्रॉम-होम' के उपाय लागू कर दिए थे और फ्यूल स्टेशनों पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर मात्रा संबंधी पाबंदियां लगा दी थीं।
उन्होंने आईएएनएस से कहा, "मुझे लगता है कि खाड़ी क्षेत्र में आए इस बड़े संकट का पूरा असर आम उपभोक्ता पर नहीं पड़ा। इसके लिए सरकार तारीफ की हकदार है।"
उन्होंने कहा कि सरकार ने नीतिगत हस्तक्षेपों के माध्यम से आपूर्ति में व्यवधान के प्रभाव को नियंत्रित किया, जिससे खुदरा ईंधन की कीमतों में तीव्र वृद्धि को रोका जा सका।
भारत की ऊर्जा संबंधी तैयारियों पर कुमार ने कहा कि तेल और गैस क्षेत्र एक अत्यधिक परस्पर जुड़े वैश्विक बाजार में काम करता है, जहां कोई भी देश पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक बुनियादी ढांचे पर निर्भर करती है और भारत सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ पिछले दशक में पर्याप्त निवेश किया है।
उन्होंने कहा,"आज तेल और गैस का कारोबार असल में एक ग्लोबल खेल है। कोई भी देश पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है; दुनिया भर में निर्यातक और आयातक हैं और बड़े पैमाने पर लेन-देन होता है। यह एक बहुत जटिल खेल है जिसे कोई भी देश अकेले नहीं खेल सकता। किसी देश की ऊर्जा सुरक्षा में इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी भूमिका होती है। पिछले दशक में भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने, कुछ प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के साथ मिलकर, जो निवेश और पूंजी लगाई है, वह काफी बड़ी रही है।"
कुमार ने मुताबिक, संघर्ष के दौरान ऊर्जा की सप्लाई बनाए रखने में बड़े पैमाने पर की गई कूटनीतिक कोशिशों ने अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि 29 फरवरी से ही उच्च-स्तरीय बातचीत और लगातार संपर्क शुरू हो गया था। अधिकारी पर्दे के पीछे चौबीसों घंटे काम कर रहे थे ताकि यह पक्का किया जा सके कि संघर्ष के सबसे मुश्किल दौर में भी भारतीय तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता मिल सके।
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Created On :   30 Jun 2026 6:12 PM IST












