डिजिटल भुगतान में तेज उछाल के बावजूद भारत में चलन में नकदी बढ़ी आरबीआई डिप्टी गवर्नर

डिजिटल भुगतान में तेज उछाल के बावजूद भारत में चलन में नकदी बढ़ी आरबीआई डिप्टी गवर्नर
भारत में पिछले एक दशक के दौरान डिजिटल भुगतान को अपनाने में तेज वृद्धि के बावजूद चलन में नकदी में कमी नहीं आई है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों, कम आय वाले समूहों, बुजुर्ग आबादी और छोटे कारोबारों में नकदी का इस्तेमाल बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मु ने यह बयान दिया।

मुंबई, 18 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में पिछले एक दशक के दौरान डिजिटल भुगतान को अपनाने में तेज वृद्धि के बावजूद चलन में नकदी में कमी नहीं आई है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों, कम आय वाले समूहों, बुजुर्ग आबादी और छोटे कारोबारों में नकदी का इस्तेमाल बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मु ने यह बयान दिया।

डिप्टी गवर्नर ने 13 अगस्त को जकार्ता में बैंक इंडोनेशिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान कहा, "डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के कारण व्यक्तिगत लेनदेन में नकदी की हिस्सेदारी घटने के बावजूद, चलन में मुद्रा दोहरे अंकों की दर से बढ़ रही है। इस संयोजन के कारण भविष्य की मांग का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे उत्पादन और वितरण क्षमता की हमारी योजना और जटिल हो जाती है।"

उन्होंने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी भुगतान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है और साफ-सुथरे नोटों, सुरक्षित लॉजिस्टिक्स और ऐसे मुद्रा तंत्र के जरिए नकदी में लोगों का भरोसा बनाए रखना, जिस पर वे निर्भर कर सकें, मौद्रिक संप्रभुता को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह ऐसा लक्ष्य है, जिसे सभी देशों के केंद्रीय बैंक साझा करते हैं, चाहे उनकी अर्थव्यवस्थाएं नकदी और डिजिटल भुगतान के किसी भी मिश्रण को अपनाएं।"

डिप्टी गवर्नर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई ने छह मूल्यवर्गों में हर साल 28 से 30 अरब बैंक नोटों का उत्पादन किया है और लगभग 21 अरब नोटों को हर साल चलन से हटा दिया है। फिलहाल भारत में 176 अरब बैंक नोट चलन में हैं।

तुलना के लिए, पिछले साल के अंत में लगभग 56 अरब अमेरिकी डॉलर के नोट और 30 अरब यूरो के बैंक नोट चलन में थे।

मुर्मू ने कहा, "तुलना के लिहाज से एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि हमारे आंकड़ों पर कुछ हद तक कम मूल्यवर्ग वाले नोटों की अधिक हिस्सेदारी का असर पड़ता है। इसका स्वाभाविक अर्थ है कि समान मूल्य के लेनदेन के लिए अधिक संख्या में नोट हाथ बदलते हैं। इसके बावजूद, यह मात्रा हमें हर दिन संभाले जाने वाले लॉजिस्टिक्स के पैमाने का अंदाजा देती है।"

मुद्रा की टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई बैंक नोटों की उम्र बढ़ाने के तरीकों पर विचार कर रहा है। इनमें नोट के आधार पर सतही कोटिंग और कम मूल्यवर्ग के लिए पॉलिमर नोट शामिल हैं। नियामक नकदी चक्र के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए भी काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इसके तहत "दक्षता के लिए अपने वितरण नेटवर्क को बेहतर बनाना और बैंक नोटों के ब्रिकेट्स के निपटान के तरीके में वैल्यू चेन में आगे बढ़ना" शामिल है।

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Created On :   18 Aug 2026 7:52 PM IST

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