ईरान युद्ध के नाम पर चैरिटी स्कैम, जम्मू-कश्मीर की अलगाववादी गतिविधियों में फंड इस्तेमाल होने का शक
नई दिल्ली, 26 मार्च (आईएएनएस)। ईरान और अमेरिका-इजरायल में जारी हमलों के बीच भारत से डोनेशन की पहल की गई। भारत के लोगों ने ईरान की मदद के लिए इंसानियत के तौर पर डोनेशन शुरू किया। इस बीच कट्टरपंथ फैलाने और चैरिटी स्कैम की खबरें भी सामने आ रही है। भारत के गृह मंत्रालय ने ईरान में युद्ध की स्थिति में कट्टरपंथ फैलाने की कोशिश कर रहे कुछ लोगों के बारे में एक एडवाइजरी जारी की थी। वहीं अब इंटेलिजेंस ब्यूरो ने अब एक चैरिटी स्कैम के खिलाफ अलर्ट जारी किया है।
ईरान में युद्ध के नाम पर डोनेशन इकट्ठा करने वाले कई समूह सामने आए हैं। एक अधिकारी ने कहा कि ये लोग युद्ध से प्रभावित ईरान के लोगों की भलाई के बहाने फंड इकट्ठा कर रहे हैं।
पिछले साल जब इजरायल और फिलिस्तीन के बीच युद्ध छिड़ा था, तब भी ऐसी ही गतिविधियों का खुलासा हुआ था। एक और अधिकारी ने कहा कि ऐसे समय में ऐसी चैरिटी शुरू होती हैं और एक बार फंड इकट्ठा हो जाने के बाद वे गायब हो जाती हैं।
ये नकली चैरिटी चलाने वाले लोग भावनात्मक तरीके से लोगों को उकसाते हैं। वे फंड इकट्ठा करने के लिए युद्ध की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करके दिखाते हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि बहुत से लोग भावुक होकर पैसे दान करते हैं और सोना भी देते हैं।
एजेंसियों के अनुसार, यह स्कैम जम्मू और कश्मीर में सबसे ज्यादा है। कुछ लोग घर-घर जाकर ईरान युद्ध से प्रभावित लोगों की मदद के लिए डोनेशन मांग रहे हैं। अधिकारियों ने पाया है कि वे कहानियां बनाते हैं और हालात को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं ताकि वे लोगों की भावना और संवेदनशीलता का फायदा उठाकर उन्हें धोखा दे सकें।
कश्मीर में अधिकारियों को पता चला है कि यह वही नेटवर्क है जो आर्टिकल 370 हटने से पहले मौजूद अलगाववादी समूहों के लिए फंड इकट्ठा करता था।
ईरान युद्ध का हवाला देकर इन समूहों ने जो डोनेशन इकट्ठा किया है, वह हैरान करने वाला है। यह करोड़ों रुपये में है। अकेले जम्मू और कश्मीर में, यह स्कैम लगभग 16 करोड़ रुपए का है। अधिकारियों को पता चला है कि लोगों ने अपनी बचत भी दे दी है। कुछ मामलों में, लोगों ने इन लोगों को सोना और यहां तक कि अपने तांबे के बर्तन भी दे दिए हैं।
एक अधिकारी ने कहा कि टारगेट ऑडियंस मुख्य रूप से शिया समुदाय रहा है। शिया मुसलमान ज्यादा कमजोर होते हैं और उन्हें इमोशनली बहकाया जा सकता है, खासकर ईरान में चल रहे युद्ध को लेकर। वे अपना पैसा दे देते हैं और इन स्कैमर्स से कोई सवाल भी नहीं करते।
एजेंसियां देश के कई दूसरे हिस्सों में भी इसी तरह की गतिविधि पर करीब से नजर रख रही हैं। यह कई जगहों पर हो रहा है, लेकिन एजेंसियों को पता चला है कि जम्मू और कश्मीर में इसका स्केल सबसे ज्यादा है।
इस स्कैम में शामिल इन लोगों ने अपने ऑपरेशन को ज्यादातर ऑफलाइन रखा है। वे घरों में जाते हैं और कमजोर लोगों को लुभाने के लिए इमोशनल और धार्मिक अपील करते हैं। लोगों को युद्ध की तस्वीरें दिखाई जाती हैं, जिसके बाद डोनेशन की अपील की जाती है।
नकली रसीदें देते समय लोगों से कहा जाता है कि पैसे ईरान में युद्ध से प्रभावित लोगों की भलाई के लिए भेजे जाएंगे। इन लोगों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना छोड़ दिया है, क्योंकि उनकी गतिविधि को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है।
एजेंसियों के लिए एक और चिंता यह है कि अब तक जमा किए गए फंड का क्या किया जा रहा है। अधिकारियों को पता चला है कि ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते हैं, लेकिन कमाई का एक बड़ा हिस्सा देश विरोधी कामों के लिए इस्तेमाल होता है।
जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन को फिर से शुरू करने की कोशिशें की जा रही हैं और एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि फंड का इस्तेमाल उसी के लिए किया जा सकता है।
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Created On :   26 March 2026 2:13 PM IST












