26 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर मनाएगा विलय दिवस, भारत के साथ ऐतिहासिक जुड़ाव के 80 साल बाद विकास की नई कहानी

अबू धाबी, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर 26 अक्टूबर को भारत में अपने विलय (एक्सेशन) की वर्षगांठ मनाएगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस ऐतिहासिक घटना के लगभग 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मनाया जाने वाला 'एक्सेशन डे' जम्मू-कश्मीर के अतीत, उसके ऐतिहासिक सफर और भविष्य की संभावनाओं पर विचार करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
यूएई के दैनिक समाचार पत्र 'गल्फ टुडे में ऋषि सूरी ने लिखा कि खाड़ी क्षेत्र (गल्फ रीजन) के लिए जम्मू-कश्मीर का विकास आर्थिक सहयोग के नए अवसर प्रदान करता है। पर्यटन, आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी), खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और कृषि निर्यात जैसे क्षेत्रों में निवेश और व्यापार के माध्यम से गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) देशों के निवेशकों और कारोबारियों के साथ साझेदारी को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन और शैक्षणिक आदान-प्रदान भी दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
1947 में पाकिस्तान से आए सशस्त्र कबायली बलों के जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने के बाद, महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी और 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' (विलय पत्र) पर हस्ताक्षर किए। हाल के वर्षों में भारत ने जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) का विकास किया है, जिसमें आर्थिक एकीकरण और सार्वजनिक सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। परिवहन कनेक्टिविटी इसमें सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक रही है।
जम्मू-कश्मीर और भारत के बाकी हिस्सों के बीच रेलवे कनेक्टिविटी और बेहतर सड़क बुनियादी ढांचे से आवागमन, व्यापार और बाजारों तक पहुंच आसान हुई है। 'गल्फ टुडे' की रिपोर्ट के अनुसार, इससे जम्मू-कश्मीर के किसानों, व्यापारियों और पर्यटन संचालकों को लाभ होगा। बेहतर कनेक्टिविटी, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं (खाड़ी देशों सहित) तक आसान पहुंच के कारण वे कश्मीर के सेब, हस्तशिल्प और केसर को बड़े बाजारों में बेच सकेंगे।
जम्मू-कश्मीर की आर्थिक मजबूती में पर्यटन एक अहम भूमिका निभाता है। यहां की झीलें, पहाड़, बगीचे और सांस्कृतिक विरासत देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। जम्मू-कश्मीर में बेहतर बुनियादी ढांचा लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है और स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और उद्योगों को बढ़ावा दे सकता है।
लोकतांत्रिक भागीदारी भी इसका एक महत्वपूर्ण पहलू है। 2024 में जम्मू-कश्मीर में हुए विधानसभा चुनावों में मतदाताओं की भारी भागीदारी देखने को मिली, जो अपने राजनीतिक और आर्थिक भविष्य को आकार देने में लोगों की सक्रिय सहभागिता को दर्शाती है।
सूरी ने लिखा, "इसलिए 'एक्सेशन डे' (विलय दिवस) केवल एक ऐतिहासिक संवैधानिक फैसले को याद करने का दिन नहीं है। यह इस बात पर विचार करने का अवसर है कि कैसे शांति, स्थिरता और समावेशी विकास आम लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।"
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