कर्नाटक कैबिनेट 'शुभा मर्डर केस' के दोषियों की दया याचिकाओं पर कर सकती है चर्चा

कर्नाटक कैबिनेट शुभा मर्डर केस के दोषियों की दया याचिकाओं पर कर सकती है चर्चा
कर्नाटक राज्य कैबिनेट, बेंगलुरु के चर्चित 2003 'रिंग रोड शुभा मर्डर केस' में दोषी ठहराई गईं शुभा शंकरनारायण और उनके सह-आरोपियों द्वारा दायर दया याचिकाओं पर विचार कर सकती हैं। एक युवक की बेरहमी से हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखने के बाद, उन्होंने राज्यपाल के पास दया याचिकाएं दायर की थीं। राज्यपाल कार्यालय ने इन याचिकाओं को राज्य सरकार के पास उनकी राय जानने के लिए भेज दिया है।

बेंगलुरु, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक राज्य कैबिनेट, बेंगलुरु के चर्चित 2003 'रिंग रोड शुभा मर्डर केस' में दोषी ठहराई गईं शुभा शंकरनारायण और उनके सह-आरोपियों द्वारा दायर दया याचिकाओं पर विचार कर सकती हैं। एक युवक की बेरहमी से हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखने के बाद, उन्होंने राज्यपाल के पास दया याचिकाएं दायर की थीं। राज्यपाल कार्यालय ने इन याचिकाओं को राज्य सरकार के पास उनकी राय जानने के लिए भेज दिया है।

राज्यपाल कार्यालय ने ये याचिकाएं राज्य सरकार, विशेष रूप से गृह विभाग को भेजी हैं ताकि इन दया याचिकाओं पर उनकी राय ली जा सके।

गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इन याचिकाओं पर विचार किया जा सकता है। इसमें यह तय किया जाएगा कि इन याचिकाओं को स्वीकार करने की सिफारिश की जाए या खारिज करने की, जिसके बाद अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंप दी जाएगी।

बता दें कि यह मामला 3 दिसंबर 2003 का है, जब इंटेल में काम करने वाले 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर बी.वी. गिरीश की हत्या कर दी गई थी। यह घटना शुभा के साथ उनकी सगाई के ठीक चार दिन बाद हुई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, शुभा, गिरीश को 'हवाई जहाज की लैंडिंग' दिखाने के बहाने आउटर रिंग रोड इलाके में ले गई थी। आरोप है कि वहां उसके साथियों ने लोहे की रॉड से गिरीश पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

जांचकर्ताओं ने पाया कि शुभा अपने परिवार द्वारा तय की गई इस सगाई के खिलाफ थी। उसने अरुण वर्मा और दो अन्य लोगों वेंकटेश और दिनेश के साथ मिलकर गिरीश की हत्या की साजिश रची थी।

शुभा, अरुण वर्मा, वेंकटेश और दिनेश को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 और 120-बी के तहत हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया।

उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने जबरन शादी से जुड़े सामाजिक और पारिवारिक दबावों को संज्ञान में लिया। साथ ही, कोर्ट ने दोषियों को अपनी गिरफ्तारी से पहले कर्नाटक के राज्यपाल के पास दया याचिकाएं दायर करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, शुभा और अन्य दोषियों ने दया याचिका के लिए राज्यपाल से संपर्क किया। अब इस प्रक्रिया के अगले चरण में इन याचिकाओं पर राज्य सरकार की राय एक अहम कारक साबित हो सकती है।

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Created On :   15 Oct 2026 3:16 PM IST

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