मणिपुर के राज्यपाल ने भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी के कार्यों की समीक्षा की

इंफाल, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने गुरुवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में भारत-म्यांमार सीमा पर चल रही बाड़बंदी के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। लोकभवन के अधिकारी ने बताया कि राज्यपाल ने बैठक में अधिकारियों को बाड़बंदी के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
लोकभवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव राजीव सिंह ठाकुर, सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह, पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह, राज्य गृह आयुक्त एन. अशोक कुमार और अतिरिक्त मुख्य सचिव उपस्थित थे।
सीमा सड़क कार्य बल (बीआरटीएफ) और असम राइफल्स के अधिकारी, तथा उखरुल के उपायुक्त भी बैठक में उपस्थित थे। चुराचंदपुर, चंदेल और तेंगनुपाल के अतिरिक्त उपायुक्त वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए। 25 बीआरटीएफ के कमान अधिकारी कर्नल देव ने सीमा पर चल रहे बाड़बंदी कार्यों की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
मणिपुर के पांच जिले चुराचंदपुर, तेंगनुपाल, चंदेल, कामजोंग और उखरुल - म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं।
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने हाल ही में नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की बैठक में लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहतर प्रबंधन, बेहतर निगरानी प्रणालियों और मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी और मानव तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नीति आयोग को यह भी बताया कि भारत-म्यांमार सीमा पर अवैध हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए गृह मंत्रालय ने 50 किलोमीटर की सीमा बाड़बंदी पूरी कर ली है।
उन्होंने कहा कि 80 किलोमीटर की बाड़बंदी का काम शुरू हो चुका है।
म्यांमार के साथ अपनी लंबी और खुली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और विश्व के प्रमुख अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन क्षेत्रों में से एक, गोल्डन ट्रायंगल के निकट होने के कारण मणिपुर और मिजोरम पूर्वोत्तर में मादक पदार्थों की तस्करी के प्रमुख गलियारों के रूप में उभरे हैं। म्यांमार, लाओस और थाईलैंड के कुछ हिस्सों से मिलकर बना गोल्डन ट्रायंगल लंबे समय से मादक दवाओं और मनोरोगी पदार्थों के अवैध उत्पादन और तस्करी से जुड़ा रहा है।
भारत के उत्तरपूर्वी राज्यों से इस क्षेत्र की निकटता के कारण सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए काम कर रही सुरक्षा बलों और मादक पदार्थों पर नियंत्रण एजेंसियों के लिए लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं।
मिजोरम के छह जिले और मणिपुर के पांच जिले म्यांमार के साथ 910 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं, जिसका अधिकांश भाग बिना बाड़ के है, जिससे यह क्षेत्र सीमा पार तस्करी और मादक पदार्थों और प्रतिबंधित वस्तुओं से जुड़ी अन्य अवैध गतिविधियों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। इस क्षेत्र में तस्करी की जाने वाली वस्तुओं और पदार्थों में अत्यधिक नशीले मेथम्फेटामाइन टैबलेट, हेरोइन, विदेशी सिगरेट, उर्वरक और अन्य प्रतिबंधित उत्पाद शामिल हैं।
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