बांग्लादेश तीन महीनों में ही महिला और बाल हिंसा के दर्ज हुए 5 हजार से ज्यादा मामले

बांग्लादेश तीन महीनों में ही महिला और बाल हिंसा के दर्ज हुए 5 हजार से ज्यादा मामले
बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का भयावह आंकड़ा सामने आया है। मार्च से मई के बीच यानी महज तीन महीनों में महिला-बाल सुरक्षा (निरोध अधिनियम) के तहत 5,448 मामले दर्ज किए गए हैं। यह जानकारी पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के हवाले से स्थानीय मीडिया ने दी है।

ढाका, 18 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का भयावह आंकड़ा सामने आया है। मार्च से मई के बीच यानी महज तीन महीनों में महिला-बाल सुरक्षा (निरोध अधिनियम) के तहत 5,448 मामले दर्ज किए गए हैं। यह जानकारी पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के हवाले से स्थानीय मीडिया ने दी है।

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में दर्ज 413 मामलों में से केवल 65 मामलों में ही तीन महीनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि 10 मामलों को जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट के साथ बंद कर दिया गया क्योंकि आरोपियों की संलिप्तता नहीं पाई गई।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) के तहत 50 थानों में इस अवधि के दौरान 178 बलात्कार के मामले दर्ज हुए, जिनमें 115 पीड़ित महिलाएं और 63 बच्चे थे।

रिपोर्ट के अनुसार, कई बलात्कार और हत्या के मामले महीनों या कभी-कभी वर्षों तक जांच के चरण में ही अटके रहते हैं। हालांकि बांग्लादेश के कानून में जांच 15 कार्यदिवसों में पूरी करने का प्रावधान है, लेकिन यह समयसीमा अक्सर पूरी नहीं हो पाती।

विशेषज्ञों का कहना है कि जो मामले मीडिया उठाता है या मानवाधिकार संगठनों की निगरानी में आते हैं, उनकी जांच तेजी से होती है, जबकि बाकी मामले अक्सर धीमे पड़ जाते हैं।

इसी बीच अवामी लीग ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि देश में सार्वजनिक परिवहन, कार्यस्थलों और सड़कों पर महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न और हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

पार्टी ने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा कि जब भी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सत्ता में रही है, तब महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जोखिम बढ़ने की बात सामने आई है।

अवामी लीग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, यह राज्य की बुनियादी जिम्मेदारी है। हर बेटी को बिना डर के सड़क पर चलने का अधिकार है।”

इस बीच स्वतंत्र सांसद रूमीन फरहाना ने भी देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि हाल के महीनों में हिंसा, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई है।

उन्होंने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के शुरुआती 100 दिनों में ही अपराधों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है।

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Created On :   18 Jun 2026 6:19 PM IST

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