हवाई अड्डा संचालकों को एयरलाइन चलाने से नहीं रोकती कोई सरकारी नीति सरकार

हवाई अड्डा संचालकों को एयरलाइन चलाने से नहीं रोकती कोई सरकारी नीति सरकार
केंद्र सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि ऐसी कोई सरकारी नीति नहीं है जो बड़े हवाई अड्डों के संचालकों को एयरलाइन कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी रखने या उनका संचालन करने से रोकती हो। हालांकि, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित कुछ हवाई अड्डों के समझौतों में स्वामित्व संबंधी कुछ प्रतिबंध मौजूद हैं।

नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि ऐसी कोई सरकारी नीति नहीं है जो बड़े हवाई अड्डों के संचालकों को एयरलाइन कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी रखने या उनका संचालन करने से रोकती हो। हालांकि, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित कुछ हवाई अड्डों के समझौतों में स्वामित्व संबंधी कुछ प्रतिबंध मौजूद हैं।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने हवाई अड्डों और एयरलाइनों के बीच क्रॉस-ओनरशिप को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया।

मंत्री ने कहा, "ऐसी कोई सरकारी नीति नहीं है जो प्रमुख हवाई अड्डों के ऑपरेटरों को एयरलाइनों में पर्याप्त हिस्सेदारी रखने या एयरलाइन संचालन से प्रतिबंधित करती हो।"

हालांकि सरकार ने यह भी बताया कि पीपीपी मॉडल पर विकसित कुछ हवाई अड्डों के लिए किए गए रियायत समझौतों में विशेष प्रावधान शामिल हैं। इन प्रावधानों के तहत अनुसूचित एयरलाइनों या उनसे संबंधित समूह कंपनियों एवं सहयोगी संस्थाओं के लिए हवाई अड्डा संचालन करने वाली कंपनियों में हिस्सेदारी रखने पर कुछ सीमाएं लगाई गई हैं।

सरकार के अनुसार, "पीपीपी मॉडल के तहत संचालित कुछ हवाई अड्डों के मौजूदा अनुबंधों में यह शर्त शामिल है कि अनुसूचित एयरलाइंस या उनसे जुड़ी संस्थाएं कंसेशनायर कंपनियों में इक्विटी हिस्सेदारी नहीं रख सकतीं।"

इस बीच, सरकार ने यह भी पुष्टि की है कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को इस संबंध में एक अनुरोध प्राप्त हुआ है, जिसमें संबंधित अनुबंध की उक्त शर्तों में छूट देने की मांग की गई है, जिससे किसी हवाई अड्डा संचालक के लिए एयरलाइन कारोबार में प्रवेश का रास्ता खुल सकता है।

मुरलीधर मोहोल ने बताया कि यह अनुरोध एएआई के पास पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक नागर विमानन मंत्रालय ने इस मामले की औपचारिक समीक्षा नहीं की है।

उन्होंने कहा, "संबंधित समझौते के प्रावधान में छूट देने का अनुरोध भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को प्राप्त हुआ है। इस विषय पर अभी नागर विमानन मंत्रालय द्वारा विचार नहीं किया गया है।"

सरकार के इस जवाब से संकेत मिलता है कि देश में एयरपोर्ट ऑपरेटर और एयरलाइन के बीच स्वामित्व संबंधों पर कोई व्यापक नीतिगत प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, कुछ पीपीपी हवाई अड्डों के अनुबंधों में मौजूद शर्तें ऐसी व्यवस्थाओं को सीमित कर सकती हैं, जब तक कि उन्हें विशेष छूट या संशोधन के माध्यम से हटाया न जाए।

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत का विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और निजी निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ रही है। ऐसे में एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच संभावित साझेदारी या एकीकृत व्यावसायिक मॉडल को लेकर उद्योग जगत में रुचि बढ़ी है।

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Created On :   10 Aug 2026 4:48 PM IST

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