पिछले तीन सालों में बंगाल में मारे गए मुसलमानों की संख्या किसी भी दूसरे राज्य से ज्यादा सामिक भट्टाचार्य
कोलकाता, 4 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को दावा किया कि पिछले तीन सालों में पश्चिम बंगाल में मारे गए मुसलमानों की संख्या किसी भी अन्य राज्य की तुलना में अधिक है।
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने बुधवार को मीडियाकर्मियों से कहा कि मैं मुस्लिम समुदाय के लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे पिछले तीन सालों में पश्चिम बंगाल में मारे गए अपने समुदाय के लोगों की संख्या की गणना करें और उस आंकड़े की तुलना देश के अन्य राज्यों के आंकड़ों से करें।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के इस आंकड़े की तुलना भाजपा शासित राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और गुजरात आदि के आंकड़ों से करें। आप देखेंगे कि इस मामले में पश्चिम बंगाल का आंकड़ा भाजपा शासित राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है।
भट्टाचार्य ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां मुस्लिम तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर उसी समुदाय के साथी पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा हत्या कर दी गई है, और इन घटनाओं को मीडिया में अक्सर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर 'गुटबाजी' के रूप में रिपोर्ट किया जाता है।
भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ कोलकाता के एक पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को लेकर सीपीआई (एम) की आलोचना भी की। यह शिकायत एक युवा सीपीआई (एम) नेता ने दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने अधिकारी पर मंगलवार को डोल यात्रा उत्सव के दौरान सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील टिप्पणी करने का आरोप लगाया है।
भट्टाचार्य ने कहा, "हालांकि मैं आज यहां विपक्ष के नेता का बचाव करने के लिए नहीं आया हूं, लेकिन मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि उन्होंने संवैधानिक सीमाओं का पूरी तरह से पालन किया है। जहां तक सीपीआई (एम) की बात है, पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह पार्टी पूरी तरह से अप्रासंगिक हो चुकी है। इसलिए वे इस तरह के हथकंडे अपनाकर खुद को बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।"
उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा इस साल के अंत में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए मतदान तिथियों की घोषणा से काफी पहले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों को तैनात करने के कदम पर भी टिप्पणी की।
भट्टाचार्य ने कहा, "पश्चिम बंगाल में आखिरी बार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव 2011 में हुए थे, जिसके साथ ही 34 साल के वाम मोर्चा शासन का अंत हुआ और तृणमूल कांग्रेस सरकार की शुरुआत हुई। तब से राज्य में एक भी चुनाव शांतिपूर्ण नहीं हुआ है। लेकिन इस बार ऐसा लगता है कि मतदान पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा।"
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Created On :   4 March 2026 10:17 PM IST











