ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट ने बागी गुट के खिलाफ पुलिस में 4 शिकायतें दर्ज कराईं

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट ने बागी गुट के खिलाफ पुलिस में 4 शिकायतें दर्ज कराईं
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी वाले तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के खिलाफ पिछले 24 घंटों में कोलकाता और उसके आसपास के चार पुलिस स्टेशनों में चार अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं।

कोलकाता, 28 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी वाले तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के खिलाफ पिछले 24 घंटों में कोलकाता और उसके आसपास के चार पुलिस स्टेशनों में चार अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं।

जिन चार पुलिस स्टेशनों में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, उनमें से दो कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और बाकी दो बिधाननगर सिटी पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले जिन दो पुलिस स्टेशनों में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, वे हैं कालीघाट पुलिस स्टेशन और प्रगति मैदान पुलिस स्टेशन।

दूसरी ओर, बिधाननगर सिटी पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले जिन दो पुलिस स्टेशनों में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, वे न्यू टाउन पुलिस स्टेशन और बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन हैं। आखिरी शिकायत बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई थी।

पार्टी के माइनॉरिटी गुट के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि चारों पुलिस स्टेशनों में दर्ज कराई गई चारों शिकायतों का सार एक ही है कि बागी गुट द्वारा आयोजित बड़े कार्यक्रमों में पार्टी के लोगो का बिना इजाजत इस्तेमाल करना और पार्टी के वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय का नाम ममता बनर्जी की जगह तृणमूल कांग्रेस के चेयरपर्सन के तौर पर गैर-कानूनी तरीके से घोषित करना।

पुराने गुट के नेता ने बताया कि 2022 में तृणमूल कांग्रेस का एक संगठनात्मक सम्मेलन हुआ था, जिसमें मौजूद प्रतिनिधियों ने ममता बनर्जी को जीवन भर के लिए पार्टी का चेयरपर्सन बनाए रखने के पक्ष में वोट दिया था।

उन्होंने बताया कि उस कॉन्फ्रेंस में डेलीगेट के तौर पर वोट देने का अधिकार सिर्फ उन्हीं लोगों को था जो कम से कम पांच साल से पार्टी के सदस्य रहे हों। हिसाब के मुताबिक, वह कॉन्फ्रेंस हर पांच साल में होनी चाहिए। यानी, अगली संगठनात्मक कॉन्फ्रेंस 2027 में होनी है। अगर इस बीच कोई खास स्थिति बनती है, तो 'चेयरपर्सन' ममता बनर्जी ही कोई खास सेशन बुला सकती हैं। लेकिन पार्टी के उस नियम को मानने के बजाय, बागी गुट ने ममता बनर्जी की गैर-मौजूदगी में गैर-कानूनी तरीके से अरूप रॉय का नाम अपने चेयरपर्सन के तौर पर घोषित कर दिया। तब से, वे अपनी मर्जी से पार्टी के लोगो और नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए, हमने चार अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में ये चार शिकायतें दर्ज कराई हैं।

हालांकि, बागी गुट का अपना तर्क है। चूंकि हम पार्टी के लोगों और फंड पर अधिकार के मामले को लेकर पहले ही भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के पास जा चुके हैं, इसलिए अब इस मामले का फैसला आयोग के स्तर पर ही होगा।

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Created On :   28 Jun 2026 11:03 AM IST

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