सेना के साहस, समर्पण और संकल्प को दर्शाता है 'ऑपरेशन दृष्टि' मनोज सिन्हा
श्रीनगर, 30 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी) मनोज सिन्हा ने बुधवार को कहा कि 'ऑपरेशन दृष्टि' सिर्फ एक मेडिकल कैंप नहीं था बल्कि यह सेना के साहस, समर्पण और देश की सेवा करने के संकल्प का प्रतीक था।
एलजी सिन्हा ने श्रीनगर के बादामी बाग छावनी के चिनार ऑडिटोरियम में 'आप दृष्टि' के तहत मेगा मोतियाबिंद सर्जरी कैंप के दूसरे चरण के समापन समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि 11वें मेगा सर्जरी कैंप ने मरीजों, डॉक्टरों, मेडिकल टीमों और सेना को एक साथ लाकर उन लोगों को बेहतर आंखों की देखभाल उपलब्ध कराई है, जिन्हें आम तौर पर आधुनिक इलाज पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि 'ऑप दृष्टि' सिर्फ एक मेडिकल कैंप नहीं है बल्कि यह दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने और उन्हें सम्मान दिलाने के लिए सेना की सेवा, साहस, संकल्प और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आभार व्यक्त करता हूं। मैं सेना प्रमुख और मेडिकल टीमों का भी धन्यवाद करता हूं।"
उन्होंने मुश्किल इलाकों में खास इलाज पहुंचाने के लिए डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ और सपोर्ट टीमों के समर्पण की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह कैंप सेवा, साहस, संकल्प और इंसानी जिंदगी को अहमियत देने की कोशिश का एक उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत 446 सर्जरी की गईं, जिनमें कुपवाड़ा के तंगधार में की गई सर्जरी भी शामिल हैं, जहां सेना और मेडिकल टीमों ने सीमावर्ती इलाके के लोगों का इलाज किया।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पहाड़ी इलाकों को देखा है, वे जानते हैं कि वहां हालात कितने मुश्किल होते हैं। वहां सड़कों की चुनौतियां हैं और गोलाबारी का भी खतरा रहता है।
उन्होंने बताया कि ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा और अन्य अधिकारियों की अगुवाई में मेडिकल टीमों ने तंगधार में जमीन के नीचे बने ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी करने की चुनौती स्वीकार की।
उन्होंने कहा, "हमारे डॉक्टरों, मेडिकल सहयोगियों और पूरी टीम ने ब्रिगेडियर संजय मिश्रा और अन्य कर्मियों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था की और जमीन के नीचे बने ओटी में सर्जरी की।"
एलजी ने कहा कि यह पहल कर्तव्य और प्रतिबद्धता की मजबूत भावना को दर्शाती है, खासकर इसलिए क्योंकि सीमावर्ती इलाकों तक खास मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरण ले जाने पड़े थे।
उन्होंने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि तंगधार वाली पहल 10वां कैंप था और सीमा के पास अपनी जगह की वजह से यह अनोखा था। वहां उपकरण और सामान हवाई जहाज से पहुंचाए गए और आसपास के इलाकों के लोग सेना और उसके जवानों की मदद से कैंप तक पहुंचकर इलाज करवा पाए।
उन्होंने कहा, "सीमावर्ती इलाकों के कई निवासियों के लिए यह पहली बार था जब उन्हें इतना बेहतर इलाज मिला। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि कैसे स्वास्थ्य सेवाएं लोगों की जिंदगी बदल सकती हैं।"
इस पहल के तहत 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की आंखों की जांच की गई और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक आंखों की जांच की सुविधाएं पहुंचाई गईं।
एलजी सिन्हा ने कहा कि इस अभियान ने सेना और स्थानीय समुदायों के बीच के रिश्ते को भी मजबूत किया है। उन्होंने कहा, "भारतीय सेना जरूरत के समय हमेशा देश और जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के साथ खड़ी रही है। सेना का सहयोग और मौजूदगी बहुत अहम है।"
उन्होंने कहा कि सेना ने न सिर्फ इलाज मुहैया कराया बल्कि मुश्किल इलाकों में रहने वाले लोगों को अपनापन और सहयोग भी दिया। उन्होंने कहा, "सेना अपना काम पूरा करके वापस नहीं लौटी है; उसने लोगों के साथ खड़े रहने का संदेश दिया है।"
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Created On :   30 Sept 2026 3:49 PM IST












