यूसीसी पश्चिम बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति का अंत करेगा भाजपा

यूसीसी पश्चिम बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति का अंत करेगा भाजपा
पश्चिम बंगाल विधानसभा के अगले सप्ताह के सत्र में नवनिर्वाचित सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किए जाने की संभावना के बीच भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को इस कदम का स्वागत किया। पार्टी ने इसे राज्य में तुष्टिकरण की राजनीति के अंत की दिशा में बड़ा कदम बताया।

नई दिल्ली, 28 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा के अगले सप्ताह के सत्र में नवनिर्वाचित सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किए जाने की संभावना के बीच भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को इस कदम का स्वागत किया। पार्टी ने इसे राज्य में तुष्टिकरण की राजनीति के अंत की दिशा में बड़ा कदम बताया।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि पश्चिम बंगाल भी उन भाजपा शासित राज्यों की सूची में शामिल होने जा रहा है, जहां सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में यूसीसी लागू किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "हम पहले ही असम और उत्तराखंड में यूसीसी लागू कर चुके हैं। गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में भी इस दिशा में पहल की गई है, क्योंकि बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।"

पश्चिम बंगाल यूसीसी विधेयक लाने वाला देश का चौथा राज्य बन सकता है। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यूसीसी कानून पारित किया था और ऐसा करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना था।

भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सत्ता में आने के छह महीने के भीतर यूसीसी लागू करने का वादा किया था। अब राज्य सरकार इसके क्रियान्वयन के लिए समिति गठित करने की तैयारी कर रही है, जिसे चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शहजाद पूनावाला ने यूसीसी का विरोध करने वाले विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार यूसीसी लागू करने की दिशा में काम कर रही है, जबकि इसके विरोध में कुछ समूह सामने आए हैं, जो महिलाओं के अधिकारों से अधिक वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता देते हैं।

उन्होंने कहा, "शाहबानो मामला हो, शायरा बानो मामला हो या फिर यूसीसी, विपक्ष हमेशा ऐसे सुधारात्मक कदमों का विरोध करता रहा है। यही लोग संविधान में यूसीसी का उल्लेख करने और गोवा में इसे लागू करने की बात करते हैं, लेकिन जब महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कदम उठाए जाते हैं तो उनका विरोध करते हैं।"

यूसीसी लागू होने पर विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम लागू होंगे, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।

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Created On :   28 Jun 2026 6:52 PM IST

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