राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर को पहुंचेंगी बस्तर, ऐतिहासिक 'मुरिया दरबार' में होंगी शामिल
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने बस्तर दौरे के तहत 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर पहुंचेंगी। इस दौरे के दौरान वह ‘बस्तर दशहरा’ के अंतर्गत आयोजित होने वाले ऐतिहासिक 'मुरिया दरबार' में शामिल होंगी और मांझी-चालकी समुदाय के सदस्यों के साथ विशेष बातचीत करेंगी।
इसके बाद, राष्ट्रपति लालबाग मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगी।
बस्तर के सांसद और दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने राष्ट्रपति को बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया था। राष्ट्रपति मुर्मु ने यह निमंत्रण स्वीकार कर लिया, जिससे उनके 23 अक्टूबर को जगदलपुर आने का रास्ता साफ हो गया।
राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को उनके प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान बस्तर आने का निमंत्रण दिया गया है।
इससे पहले, बस्तर के मांझी-चालकी (पारंपरिक आदिवासी समुदाय के प्रमुखों) के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के दौरान भी उनसे इस क्षेत्र में आने का आग्रह किया गया था, जिसे उन्होंने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। उनका छत्तीसगढ़ दौरा 22 और 23 अक्टूबर को तय है। 23 अक्टूबर को वह 'मुरिया दरबार' में शामिल होने के लिए जगदलपुर जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, "राष्ट्रपति का बस्तर आना हम सभी के लिए बहुत खुशी और गर्व की बात है।" उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले आम लोगों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
इस हाई-प्रोफाइल दौरे की तैयारियों के सिलसिले में जिला कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, प्रोटोकॉल, बैठने की व्यवस्था और अन्य सभी जरूरी इंतजामों की विस्तृत समीक्षा की गई। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए कि वे सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर लें।
समीक्षा बैठक के बाद, कलेक्टर और एसपी ने लालबाग मैदान में जाकर खुद मौके का मुआयना किया। उन्होंने मंच के निर्माण, सुरक्षा इंतजामों, विशिष्ट अतिथियों और आम जनता के लिए अलग-अलग प्रवेश व निकास मार्गों, पीने के पानी की व्यवस्था, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं और वाहनों की पार्किंग के इंतजामों का जायजा लिया।
मुरिया दरबार का गहरा ऐतिहासिक महत्व है। बस्तर रियासत के समय, दशहरा के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद राजा एक 'दरबार' लगाते थे, जिसमें वे लोगों की समस्याएं सुनते थे। गांवों के मांझी और मुखिया अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं और जरूरतें राजा के सामने रखते थे। यह पारंपरिक सभा बस्तर दशहरा का एक अहम हिस्सा थी।
राजशाही व्यवस्था के खत्म होने और देश में लोकतंत्र आने के बाद इस 'दरबार' का स्वरूप भी बदल गया है। आज, प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में, क्षेत्रीय समस्याओं, मांगों और अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होती है। पूर्व राजपरिवार के सदस्य भी इस आयोजन में शामिल होते हैं, जिससे यह पारंपरिक जुड़ाव आज भी कायम है।
राष्ट्रपति मुर्मु के 'मुरिया दरबार' में शामिल होने और उसके बाद उनके सार्वजनिक संबोधन के दौरान भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है, जो बस्तर की सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक भावना को उजागर करेगा।
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Created On :   16 Oct 2026 8:51 PM IST












