जीई फसलों को अपनाने में तेजी लाने की मांग, गोलमेज सम्मेलन में उठा मुद्दा

जीई फसलों को अपनाने में तेजी लाने की मांग, गोलमेज सम्मेलन में उठा मुद्दा
कृषि मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी एक बयान के अनुसार, यहां आयोजित विशेषज्ञों के एक उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन में भारत में आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) और जीनोम-संपादित (जीई) फसलों को सुरक्षित रूप से अपनाने में तेजी लाने के लिए विज्ञान-आधारित नियामक सुधारों की मांग की गई है।

नई दिल्ली, 26 जुलाई (आईएएनएस)। कृषि मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी एक बयान के अनुसार, यहां आयोजित विशेषज्ञों के एक उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन में भारत में आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) और जीनोम-संपादित (जीई) फसलों को सुरक्षित रूप से अपनाने में तेजी लाने के लिए विज्ञान-आधारित नियामक सुधारों की मांग की गई है।

'जीएम और जीई फसल पौधों के नियमों और अनुमोदन में सुधार' विषय पर आयोजित यह गोलमेज सम्मेलन कृषि विज्ञान संवर्धन ट्रस्ट (टीएएएस) द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एफएसआईआई) के सहयोग से आयोजित किया गया था।

गोलमेज सम्मेलन में विज्ञान-आधारित, पारदर्शी, कुशल और जोखिम-अनुरूप नियामक ढांचे की मांग की गई, जिसमें सुव्यवस्थित और समयबद्ध अनुमोदन प्रक्रियाएं हों और जो सार्वजनिक और निजी दोनों नवोन्मेषकों के लिए सुलभ हों। बयान में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन, उत्पादकता, पोषण सुरक्षा, किसानों की आय और भारतीय कृषि की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए सुरक्षित जीएम और जीई फसलों को समय पर अपनाना महत्वपूर्ण है।

प्रतिभागियों ने कहा कि यद्यपि भारत ने जैव सुरक्षा विनियमन में तीन दशकों से अधिक का अनुभव और मजबूत वैज्ञानिक क्षमताएं विकसित कर ली हैं, फिर भी जैव प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से जीनोम संपादन में हो रही प्रगति के साथ तालमेल बिठाने के लिए नियामक ढांचे को विकसित करना आवश्यक है। साथ ही जैव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के उच्चतम मानकों को बनाए रखना भी जरूरी है।

राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए लक्षित आनुवंशिक रूप से विकसित फसलों (जीएम और जीई) के कुशल अनुमोदन हेतु एक रोडमैप तैयार करने के लिए यह गोलमेज बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें नियामक दक्षता और जैव सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित किया गया था। गोलमेज बैठक से प्राप्त सिफारिशों को एक व्यापक नीति दस्तावेज में संकलित किया जाएगा, जिसे संबंधित मंत्रालयों और नियामक प्राधिकरणों को प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि भारत में जीएम और जीनोम-संपादित फसल पौधों के विनियमन और अनुमोदन में साक्ष्य-आधारित सुधारों का समर्थन किया जा सके।

इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों, नियामकों, उद्योगपतियों, अर्थशास्त्रियों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों सहित 80 से अधिक प्रतिभागियों ने भारत के कृषि जैव प्रौद्योगिकी नियामक ढांचे के आधुनिकीकरण पर विचार-विमर्श करने के लिए भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और सतत कृषि विकास प्राप्त करने के लिए आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग को सुगम बनाने वाली संतुलित नियामक प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।

टीएएएस के अध्यक्ष आरएस परोदा ने इस बात पर जोर दिया कि गोलमेज सम्मेलन से प्राप्त सिफारिशें भारत के नियामक ढांचे के आधुनिकीकरण और मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता और पर्यावरण की सुरक्षा करते हुए जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा देने वाले अनुकूल नीतिगत वातावरण के निर्माण का आधार बननी चाहिए। उन्होंने परीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए मौजूदा कई दिशा-निर्देशों की समीक्षा की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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Created On :   26 July 2026 8:36 PM IST

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