तमिल विद्वान सोलोमन पप्पैया का राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
चेन्नई, 12 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि प्रसिद्ध तमिल विद्वान और प्रोफेसर सोलोमन पप्पैया का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। सोलोमन पप्पैया का शुक्रवार को मदुरै के एक निजी अस्पताल में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया था। वे 90 वर्ष के थे।
यह फैसला तमिल भाषा, साहित्य और सार्वजनिक चर्चा में पप्पैया के बड़े योगदान को देखते हुए लिया गया है। राज्य सरकार पारंपरिक रूप से प्रमुख तमिल विद्वानों, लेखकों और फिल्म जगत की हस्तियों के अंतिम संस्कार के दौरान राजकीय सम्मान देती रही है।
सोलोमन पप्पैया का पार्थिव शरीर मदुरै के ज्ञानोलीपुरम स्थित उनके आवास पर रखा गया था, ताकि आम लोग, राजनीतिक नेता, लेखक, शिक्षाविद और उनके प्रशंसक अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें।
परिवार ने बताया कि शनिवार दोपहर मदुरै के थाथनेरी इलेक्ट्रिक श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। तमिलनाडु के सबसे पहचाने जाने वाले बुद्धिजीवियों में से एक, सोलोमन पप्पैया ने अपनी खास शैली में पट्टिमंद्रम यानी तमिल वाद-विवाद कार्यक्रमों के जरिए शास्त्रीय तमिल साहित्य और समसामयिक सामाजिक मुद्दों को आम लोगों के करीब पहुंचाया।
कई दशकों के करियर में उन्होंने भारत और विदेशों में 12,000 से अधिक पट्टिमंद्रम कार्यक्रमों का संचालन किया। उनकी हाजिरजवाबी, सादगी, हास्य और जटिल साहित्यिक व सामाजिक विषयों को आसान भाषा में समझाने की क्षमता ने उन्हें हर पीढ़ी में लोकप्रिय बनाया।
1990 के दशक की शुरुआत से टेलीविजन ने सोलोमन पप्पैया को तमिल साहित्य और सांस्कृतिक चर्चाओं को राज्य के हर घर तक पहुंचाने में मदद की। अपने कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने दर्शकों को तिरुक्कुरल और अन्य शास्त्रीय रचनाओं की समृद्धि से परिचित कराया, साथ ही पारिवारिक रिश्तों, बदलते सामाजिक मूल्यों और रोजमर्रा की जिंदगी पर बहस को भी बढ़ावा दिया।
विशेषज्ञ अक्सर उन्हें टेलीविजन के जरिए तमिल पहचान और संस्कृति को बढ़ावा देने का श्रेय देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे द्रविड़ आंदोलन के नेताओं ने पहले सिनेमा के जरिए आम लोगों तक पहुंच बनाई थी।
टेलीविजन व्यक्तित्व और वाद-विवाद संचालक के रूप में अपार लोकप्रियता के अलावा, सोलोमन पप्पैया को अकादमिक जगत में भी उनकी विद्वता के लिए सम्मान मिला। प्रोफेसरों और तमिल शोधकर्ताओं ने साहित्यिक अध्ययन में उनके योगदान को याद किया, जिसमें संगम साहित्य पर उनका हालिया काम भी शामिल है।
अपने जीवनकाल में सोलोमन पप्पैया को कई पुरस्कार मिले। केंद्र सरकार ने उन्हें 2021 में पद्म श्री से सम्मानित किया था, जबकि तमिलनाडु सरकार ने उन्हें 2000 में कलैमामणि पुरस्कार दिया था।
कलैमामणि पुरस्कार तमिलनाडु राज्य का सर्वोच्च कला और नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार राज्य के बेहतरीन कलाकारों को उनकी कला के लिए दिया जाता है।
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Created On :   12 Sept 2026 1:45 PM IST












