त्रिपुरा स्वायत्त परिषद चुनाव 13 अप्रैल को, आदिवासी क्षेत्रों में सियासी मुकाबला तेज

त्रिपुरा स्वायत्त परिषद चुनाव 13 अप्रैल को, आदिवासी क्षेत्रों में सियासी मुकाबला तेज
त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को 30 सदस्यीय त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त ज़िला परिषद (टीटीएएडीसी) के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयोग के मुताबिक, चुनाव 13 अप्रैल को होंगे, जिससे राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।

अगरतला, 17 मार्च (आईएएनएस)। त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को 30 सदस्यीय त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त ज़िला परिषद (टीटीएएडीसी) के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयोग के मुताबिक, चुनाव 13 अप्रैल को होंगे, जिससे राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने बताया कि 18 मार्च को अधिसूचना जारी की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 25 मार्च तय की गई है। 26 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 28 मार्च तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। वोटों की गिनती 17 अप्रैल को की जाएगी।

चुनाव की घोषणा के साथ ही टीटीएएडीसी क्षेत्रों में आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

आयोग के अनुसार, इस बार कुल 9,62,697 मतदाता मतदान के पात्र हैं, जिनमें 4,80,666 महिला मतदाता शामिल हैं। पुलिस महानिदेशक अनुराग ने कहा कि चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।

साल 2021 से इस परिषद पर टीटीएएडीसी का नियंत्रण है, जिसका नेतृत्व प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा कर रहे हैं। यह पार्टी सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी है।

परिषद में 28 निर्वाचित और 2 मनोनीत सदस्य होते हैं। 2021 के चुनाव में टीएमपी ने 18 सीटें जीतकर वाम मोर्चा से सत्ता छीन ली थी, जबकि भाजपा ने 11 में से 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी जीत हासिल की थी।

टीटीएएडीसी राज्य के कुल 10,491 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लगभग दो-तिहाई हिस्से का प्रशासन संभालती है, जहां करीब 12.16 लाख लोग रहते हैं। इनमें लगभग 84 प्रतिशत आबादी आदिवासी समुदाय की है।

इस परिषद की स्थापना 23 अगस्त 1984 को आदिवासी समुदाय के अधिकारों, कल्याण और विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। 1985 में इसके लिए पहली बार चुनाव कराए गए थे।

आगामी चुनाव को लेकर बीजेपी, इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा, टीएमपी के अलावा विपक्षी दल, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और इंडियन नेशनल कांग्रेस ने भी आदिवासी मतदाताओं को साधने के लिए अपने अभियान तेज कर दिए हैं।

त्रिपुरा की कुल 42 लाख आबादी में आदिवासियों की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई है और राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।

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Created On :   17 March 2026 11:05 PM IST

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