'स्टिंग ऑपरेशन' को हल्के में ले रही कर्नाटक सरकार एचडी कुमारस्वामी

बेंगलुरु, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन को लेकर केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कर्नाटक सरकार पर इस मामले को हल्के में लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले में एक अहम व्यक्ति को सिर्फ औपचारिकता के तौर पर समन भेजा है।
बेंगलुरु में जेडीएस मुख्यालय जेपी भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि सिद्दारमैया की छवि खराब करने के लिए बनाए गए स्टिंग ऑपरेशन वीडियो में एक मीडिया कर्मी शामिल है। उन्होंने राज्य सरकार की जांच पर सवाल उठाए और चेतावनी दी कि अगर सरकार आरोपी को अग्रिम जमानत दिलाने में मदद करती है तो जेडीएस चुप नहीं बैठेगी।
कुमारस्वामी ने कहा कि खबरें हैं कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार गुरुवार को दिल्ली दौरे के दौरान एआईसीसी महासचिव और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल से मिले थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि जेडीएस इस स्टिंग ऑपरेशन विवाद का राजनीतिकरण कर रही है।
इस आरोप का जवाब देते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि शिवकुमार ने दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की और कर्नाटक के हित में कई मुद्दे उठाए, लेकिन उन्होंने इस विवाद को लेकर कांग्रेस हाईकमान के नेताओं से भी मुलाकात की है।
कुमारस्वामी ने शिवकुमार के उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने कहा था कि गृह मंत्री प्रियांक खड़गे भी वेणुगोपाल के घर गए थे और उनका वहां होना सिर्फ संयोग था। केंद्रीय मंत्री ने बैठकों की परिस्थितियों पर सवाल उठाया और मुख्यमंत्री पर मीडिया कर्मी की संलिप्तता को कम करके आंकने का आरोप लगाया।
कुमारस्वामी ने कहा, "मुद्दा यह नहीं है कि क्या जेडीएस इस मामले का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। सवाल यह है कि क्या सच सामने आएगा और न्याय होगा।"
उन्होंने आरोप लगाया कि स्टिंग ऑपरेशन का मकसद सिद्दारमैया की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना था और आरोपी के साथ नरमी बरती जा रही है क्योंकि वह मुख्यमंत्री के करीबी हैं। उन्होंने कहा कि उस मीडिया कर्मी की शिवकुमार तक आसानी से पहुंच है।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाते हुए कहा, "मेरे पास जो जानकारी है, उसके मुताबिक वह व्यक्ति परसों मैसूर के रेडिसन होटल में ठहरा हुआ था और उसे वहां से लाया गया। कल उसे सिर्फ औपचारिकता के तौर पर समन जारी किया गया।"
केंद्रीय मंत्री ने जांच को लेकर भी सवाल उठाए और जांच की अगुवाई कर रहे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजय हिलोरी का जिक्र किया। उन्होंने आईएमए पोंजी स्कीम मामले में हिलोरी के कथित संबंध का हवाला दिया और इस बात पर भी सवाल उठाया कि स्टिंग ऑपरेशन मामले में अग्रिम जमानत मांगने वाले व्यक्ति ने उसी वकील को क्यों नियुक्त किया जिसने पहले हिलोरी का केस लड़ा था।
कुमारस्वामी ने कहा कि यह स्टिंग ऑपरेशन विवाद सिद्दारमैया की छवि खराब करने के लिए है और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच निष्पक्ष तरीके से चले। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार चुप रही और आरोपी को जमानत दिलाने में मदद की तो जेडीएस शांत नहीं बैठेगी।
उन्होंने कहा, "मैं सरकार को चेतावनी दे रहा हूं। अगर वह चुप रही और उसकी अग्रिम जमानत याचिका में उसे जमानत दिलाने में मदद करती है तो हम चुप नहीं बैठेंगे।"
स्टिंग ऑपरेशन को जेडीएस की साजिश बताने के आरोपों को खारिज करते हुए कुमारस्वामी ने कांग्रेस नेतृत्व के रवैये पर सवाल उठाया और सिद्दारमैया के कद का बचाव किया।
उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी में सिद्दारमैया के अलावा इतना बड़ा नेता और कौन है? सिद्दारमैया को घर बैठने के लिए मजबूर किया गया है और अब वे दावा कर रहे हैं कि यह जेडीएस की साजिश है। सिद्दारमैया के अलावा वोट कौन ला सकता है? आप उनकी वजह से बचे हुए हैं।"
कुमारस्वामी ने कहा कि लोग पूछ सकते हैं कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद वह सिद्दारमैया के समर्थन में क्यों बोल रहे हैं। उन्होंने कहा, "आप पूछ सकते हैं कि मैं सिद्दारमैया के पक्ष में क्यों बोल रहा हूं। हां, मैंने उनके खिलाफ लड़ाई लड़ी है, लेकिन इस मामले को राजनीतिक पैंतरेबाजी कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए और आरोपों की गंभीर जांच होनी चाहिए।"
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