पूर्वी डीआरसी में हिंसा से बढ़ा विस्थापन, इबोला से निपटना हुआ मुश्किल संयुक्त राष्ट्र

पूर्वी डीआरसी में हिंसा से बढ़ा विस्थापन, इबोला से निपटना हुआ मुश्किल  संयुक्त राष्ट्र
डीआरसी इन दिनों दोहरी मार झेल रहा है। पूर्वी इलाके में हिंसा बढ़ रही है नतीजतन लोग बड़ी संख्या में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं तो दूसरी ओर इबोला का प्रकोप की रफ्तार भी तेज है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इन मुश्किलों के बीच उनके कार्यकर्ताओं को काम करने में दिक्कत पेश आ रही है।

न्यूयॉर्क, 2 सितंबर (आईएएनएस)। डीआरसी इन दिनों दोहरी मार झेल रहा है। पूर्वी इलाके में हिंसा बढ़ रही है नतीजतन लोग बड़ी संख्या में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं तो दूसरी ओर इबोला का प्रकोप की रफ्तार भी तेज है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इन मुश्किलों के बीच उनके कार्यकर्ताओं को काम करने में दिक्कत पेश आ रही है।

संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने मंगलवार (स्थानीय समय) को कहा कि हिंसा के कारण लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ रहा है। किसी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में वो पलायन कर रहे हैं। एक-क्षेत्र से दूसरी जगह आने जाने से बीमारी के प्रसार पर नजर रखना मुश्किल हो गया है और उससे निपटने की कोशिशों में बाधा आ रही है।

रविवार तक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने 2,950 लोगों की मौत और 6,100 लोगों के इबोला संक्रमित होने की पुष्टि की।

ओसीएचए ने बताया कि इतूरी प्रांत में (स्थानीय नागरिक समाज के सूत्रों के अनुसार) शनिवार को मंबासा इलाके में हुए सशस्त्र हमलों में 37 मासूम लोग मारे गए और 35 से ज्यादा का अपहरण कर लिया गया। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने हिंसक हमलों में 86 आम नागरिक मारे गए थे।

पड़ोसी साउथ किवु प्रांत के वालुंगु इलाके में हिंसक झड़प में 23 अगस्त से अब तक करीब 15,000 लोग विस्थापित हो गए हैं। विस्थापितों में से अधिकतर अपने रिश्तेदारों या जान-पहचान के लोगों के साथ रह तो रहे हैं लेकिन उन्हें भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सेवा जैसी मूलभूत सुविधाओं की बहुत जरूरत है। नॉर्थ किवु प्रांत के कुछ हिस्सों में भी हिंसक संघर्ष के कारण लोगों को पलायन करना पड़ रहा है।

ओसीएचए ने कहा, "इन चुनौतियों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र और उसके कार्यकर्ता मदद पहुंचा रहे हैं।"

इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन ने कहा कि उसने डीआरसी और पड़ोसी देशों में लगभग 2.3 करोड़ लोगों का हेल्थ चेकअप किया। इससे लोगों की आवाजाही पर नजर रखने, संभावित मामलों का पता लगाने और सीमा-पार संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिली है।

संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से आम नागरिकों को हिंसा से बचाने के साथ ही सुरक्षित, निरंतर और बिना किसी बाधा के मानवीय सहायता पहुंचाने में मदद करने की अपनी अपील दोहराई।

संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों और आपातकालीन राहत समन्वय के अवर-महासचिव टॉम फ्लेचर ने कहा, "हम ऐसी महामारी का धीरे-धीरे या टुकड़ों में जवाब नहीं दे सकते जो तेजी से फैल रही है।"

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा आयोजित एक वर्चुअल ब्रीफिंग में फ्लेचर ने इबोला वायरस से निपटने के लिए निरंतर और बड़े पैमाने पर अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोगों को काम करने वाली स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ जल, साफ-सफाई, भोजन, सुरक्षा की जरूरत है। सबसे बढ़कर, उन्हें भरोसे की जरूरत है।

राहत कार्य प्रमुख ने कहा, "समय हमारे पक्ष में नहीं है। हमारे पास अनुभव, साधन और ऐसे असाधारण लोग हैं जो इस महामारी को रोकने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। अब हमें राजनीतिक इच्छाशक्ति, पहुंच और संसाधनों की जरूरत है। हमने पहले भी इबोला को हराया है और हम ऐसा फिर से कर सकते हैं।"

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Created On :   2 Sept 2026 12:35 PM IST

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