विजयन सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य क्षेत्र की खरीद पर एक और जांच, आयुर्वेद अस्पतालों के फर्नीचर खरीद मामले की होगी पड़ताल
तिरुवनंतपुरम, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरलम में पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल के दौरान सरकारी आयुर्वेद अस्पतालों के लिए फर्नीचर खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच की जाएगी। यह स्वास्थ्य क्षेत्र में खरीद और वित्तीय फैसलों से जुड़े मामलों की श्रृंखला में एक और जांच है, जिसके आदेश स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने दिए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने सोमवार को व्यापक जांच के आदेश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव की उस सिफारिश को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि वित्त विभाग की जांच ही पर्याप्त होगी।
यह जांच मुख्य रूप से पीआर साजी पर केंद्रित होगी, जो पहले नेशनल आयुष मिशन में राज्य कार्यक्रम प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे।
जांच के अनुसार, कन्नूर जिले के पिनाराई स्थित सरकारी आयुर्वेद अस्पताल में भवन निर्माण पूरा होने से पहले ही 11.45 लाख रुपए मूल्य का फर्नीचर खरीद लिया गया था।
इसके अलावा मट्टन्नूर, चालाकुडी और वेंगानूर के सरकारी आयुर्वेद अस्पतालों में भी बड़े पैमाने पर फर्नीचर खरीद में निर्धारित नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं।
यह ताजा जांच राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में खरीद और वित्तीय निर्णयों की बढ़ती पड़ताल का हिस्सा है। इसमें चिकित्सा उपकरणों, दवाओं और सरकारी एजेंसियों के माध्यम से की गई अन्य खरीद भी जांच के दायरे में हैं।
इससे पहले जुलाई में स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन ने पिछले 10 वर्षों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा खरीदे गए प्रमुख चिकित्सा उपकरणों की विभागीय जांच के आदेश दिए थे।
यह कदम उन रिपोर्टों के बाद उठाया गया था, जिनमें कहा गया था कि मोबाइल मोर्चरी सहित कई महंगे उपकरण सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में बिना इस्तेमाल के पड़े हैं।
इस जांच में योजना निधि, प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत खरीदे गए उपकरण तथा कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र सरकार से प्राप्त उपकरण भी शामिल हैं।
अगस्त में मंत्री ने केरल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (केएमएससीएल) द्वारा ब्लीचिंग पाउडर की खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले को सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) को सौंप दिया था। इस खरीद में 7.32 करोड़ रुपए के संभावित अनावश्यक खर्च का आरोप लगाया गया था और विभागीय जांच को अपर्याप्त माना गया था।
इसके अलावा, राज्य की आयुर्वेदिक दवा कंपनी औषधि में कथित वित्तीय अनियमितताओं, निर्माण ठेकों और खरीद संबंधी विसंगतियों की जांच के लिए भी सतर्कता जांच की मांग की गई है।
लगातार हो रही ये जांचें इस बात का संकेत हैं कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक खर्च और खरीद प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा कर रही है।
इन जांचों के निष्कर्षों से यह तय होगा कि कहीं प्रक्रियागत चूक या वित्तीय अनियमितताएं हुई थीं या नहीं, और यदि हुई थीं तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
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Created On :   19 Oct 2026 8:26 PM IST












