Delhi News: रेपो रेट बढ़ा तो रियल एस्टेट पर कितना पड़ेगा असर? जानें घर खरीदने वालों पर क्या होगा असर

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक से पहले रेपो रेट में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर रियल एस्टेट क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। बाजार में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो होम लोन की ब्याज दर और ईएमआई पर असर पड़ सकता है। इससे घर खरीदने की योजना बना रहे कुछ लोगों का मासिक बजट बढ़ सकता है और वे खरीदारी का फैसला कुछ समय के लिए टाल सकते हैं।
हालांकि, रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रेपो रेट में मामूली बढ़ोतरी होती है तो इसका असर पूरे बाजार पर बहुत ज्यादा नहीं होगा। घरों की मांग अब केवल ब्याज दर पर निर्भर नहीं है। लोगों की आय में बढ़ोतरी, रोजगार के अवसर, बेहतर सड़क और परिवहन सुविधाएं, बढ़ता शहरीकरण और घर खरीदने की जरूरत जैसे कई दूसरे कारण भी बाजार को गति दे रहे हैं।
काउंटी ग्रुप के निदेशक अमित मोदी के अनुसार, त्योहारी मौसम में ब्याज दरों का स्थिर रहना घर खरीदने वालों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण होता है। अगर रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होती है तो इससे होम लोन की ईएमआई बढ़ सकती है। इसका असर खास तौर पर पहली बार घर खरीदने वाले और कीमत को लेकर अधिक संवेदनशील लोगों पर पड़ सकता है।
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कुशाग्र अंसल, डायरेक्टर, अंसल हाउसिंग ने कहा, “रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर होम लोन की लागत पर पड़ता है। इससे खरीदार की ईएमआई बढ़ सकती है और कुछ लोग घर खरीदने का फैसला कुछ समय के लिए टाल सकते हैं। लेकिन अगर बढ़ोतरी सीमित रहती है तो इसका असर पूरे रियल एस्टेट बाजार पर बहुत अधिक नहीं होगा। जिन बाजारों में घरों की मांग मजबूत है, वहां खरीदार मामूली बढ़ोतरी के बावजूद खरीदारी जारी रख सकते हैं।”
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर सभी तरह के घरों पर एक जैसा नहीं होगा। अफोर्डेबल और मिड-इनकम श्रेणी के घरों पर इसका असर अधिक दिखाई दे सकता है। इन श्रेणियों में घर खरीदने वाले लोग आमतौर पर ईएमआई और मासिक खर्च को ध्यान में रखकर फैसला लेते हैं। ईएमआई में थोड़ी बढ़ोतरी भी उनके बजट को प्रभावित कर सकती है।
वहीं, प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग पर इसका असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है। इस श्रेणी के खरीदार ब्याज दर में छोटे बदलाव की तुलना में घर की जगह, सुविधाओं, स्थान और गुणवत्ता को अधिक महत्व देते हैं।
मिगसन ग्रुप के निदेशक यश मिगलानी ने कहा, “ब्याज दर रियल एस्टेट में मांग को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन यह अकेला कारक नहीं है। आज खरीदार बेहतर स्थान, अच्छी कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाओं और भरोसेमंद डेवलपर को भी महत्व दे रहे हैं। इसलिए रेपो रेट में सीमित बढ़ोतरी से बाजार की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है, लेकिन मांग में बड़ी गिरावट जरूरी नहीं है।”
रेपो रेट में बदलाव का असर केवल घर खरीदने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। डेवलपर्स के लिए भी कर्ज लेना महंगा हो सकता है। निर्माण और परियोजनाओं के लिए लिए गए कर्ज पर ब्याज बढ़ने से परियोजना की कुल लागत पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर खास तौर पर उन डेवलपर्स पर अधिक हो सकता है जो अपनी परियोजनाओं के लिए कर्ज पर ज्यादा निर्भर हैं।
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का के अनुसार, “ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में डेवलपर्स के लिए कीमतों को संतुलित रखना जरूरी होगा। इसके साथ आसान भुगतान योजना और खरीदारों के लिए सुविधाजनक विकल्प दिए जा सकते हैं। इससे बढ़ी हुई ईएमआई का कुछ असर कम किया जा सकता है। मजबूत वित्तीय स्थिति वाले डेवलपर्स के लिए ऐसी स्थिति को संभालना अपेक्षाकृत आसान होगा।”
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सलिल कुमार, डायरेक्टर-मार्केटिंग एंड बिजनेस मैनेजमेंट, सीआरसी ग्रुप ने कहा, “आरबीआई के रेपो रेट के फैसले से पहले हमारा मानना है कि ब्याज दरों को लेकर संतुलित और सोच-समझकर अपनाया गया रुख रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक रहेगा। बाजार में पहले से अच्छी गति बनी हुई है और कर्ज की लागत का अनुमान के मुताबिक रहना खरीदारों का भरोसा बनाए रखने के साथ डेवलपर्स को परियोजनाओं की योजना और निर्माण के लिए बेहतर स्पष्टता दे सकता है। वहीं, ग्राहक अब पहले की तुलना में अधिक सोच-समझकर घर खरीद रहे हैं। वे घर के डिजाइन, जगह, गुणवत्ता और पूरे रहने के अनुभव को महत्व दे रहे हैं। इसलिए ब्याज दरों में मामूली बदलाव से मांग पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है, लेकिन अगर दरें लंबे समय तक बढ़ती हैं, तो खरीदार महंगी संपत्तियों की खरीद को लेकर अधिक सावधानी बरत सकते हैं। नीतिगत स्थिरता से मौजूदा बाजार की गति को बनाए रखने में मदद मिलेगी।”
अमोघ बंसल, एमडी, MUREC ने कहा, “आरबीआई के रेपो रेट के फैसले से पहले हमारा मानना है कि आवासीय रियल एस्टेट की गति को बनाए रखने के लिए संतुलित और सोच-समझकर अपनाई गई नीतिगत व्यवस्था जरूरी है। रियल एस्टेट में खरीदारों की पसंद लगातार बदल रही है। अब अच्छी तरह से योजनाबद्ध प्रोजेक्ट, बड़े और बेहतर डिजाइन वाले घर, गुणवत्ता और बेहतर जीवनशैली से जुड़ी सुविधाओं की मांग बढ़ रही है। साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और बेहतर घरों की बढ़ती जरूरत के कारण नए इलाकों का महत्व भी बढ़ रहा है।
रजत गोयल, मैनेजिंग डायरेक्टर, MRG Group ने कहा, “आरबीआई के आगामी रेपो रेट फैसले को देखते हुए हमारा मानना है कि महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के बीच संतुलन रखना जरूरी है। रियल एस्टेट के लिए कर्ज की लागत में स्थिरता और स्पष्टता महत्वपूर्ण है, क्योंकि घर खरीदना लंबे समय का फैसला होता है और खरीदारों की पसंद भी लगातार बदल रही है। गुरुग्राम में हम देख रहे हैं कि लोग बेहतर योजना, जगह के सही इस्तेमाल, डिजाइन और जीवन की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। ऐसे माहौल में ब्याज दरों का स्थिर और अनुमान के मुताबिक रहना खरीदारों को अधिक भरोसे के साथ फैसला लेने में मदद करेगा। साथ ही, डेवलपर्स को आज के होमबायर्स की जरूरतों के अनुसार बेहतर और सुनियोजित प्रोजेक्ट विकसित करने पर ध्यान देने में मदद मिलेगी।”
हालांकि, बुनियादी ढांचे से जुड़े इलाकों में रियल एस्टेट की मांग मजबूत रह सकती है। एक्सप्रेसवे, मेट्रो, हवाई अड्डे और अन्य बड़ी परियोजनाओं के आसपास घर खरीदने वाले लोग केवल मौजूदा कीमत या ईएमआई को नहीं देखते। वे बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार के अवसर और भविष्य में संपत्ति की कीमत बढ़ने की संभावना को भी ध्यान में रखते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि रेपो रेट में एक बार की 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी को रियल एस्टेट के लिए बड़ा झटका मानना सही नहीं होगा। असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ब्याज दर कितनी बढ़ती है और ऊंची दर कितने समय तक बनी रहती है। अगर बढ़ोतरी सीमित रहती है तो खरीदार और डेवलपर दोनों इसे आसानी से संभाल सकते हैं। लेकिन लगातार और बड़ी बढ़ोतरी से ईएमआई, निर्माण लागत और घर की कुल कीमत पर दबाव बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, रेपो रेट में संभावित बढ़ोतरी से रियल एस्टेट बाजार पर कुछ समय के लिए हल्का दबाव देखने को मिल सकता है। कुछ खरीदार अपनी खरीदारी टाल सकते हैं या अपने बजट के अनुसार छोटे घर का विकल्प चुन सकते हैं। इसके बावजूद मजबूत आवासीय मांग, बढ़ता शहरीकरण, लोगों की आय में वृद्धि और बेहतर बुनियादी ढांचा बाजार को सहारा देते रह सकते हैं। ऐसे में मामूली रेपो रेट बढ़ोतरी से बाजार की रफ्तार थोड़ी प्रभावित हो सकती है, लेकिन रियल एस्टेट क्षेत्र की लंबी अवधि की संभावनाएं मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।
Created On :   5 Oct 2026 9:12 PM IST












