इंडोनेशिया में खुलेगा आईआईएम बेंगलुरु का कैंपस, दो चरणों में लागू होगी परियोजना

इंडोनेशिया में खुलेगा आईआईएम बेंगलुरु का कैंपस, दो चरणों में लागू होगी परियोजना
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारत के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के वैश्विक विस्तार की श्रृंखला में यह एक नया अध्याय है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु इस परियोजना को दो चरणों में लागू करेगा।

नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी आईआईएम बेंगलुरु इंडोनेशिया में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर स्थापित करेगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारत के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के वैश्विक विस्तार की श्रृंखला में यह एक नया अध्याय है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु इस परियोजना को दो चरणों में लागू करेगा।

पहले चरण में वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के नेताओं और सार्वजनिक क्षेत्र के पेशेवरों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कार्यकारी शिक्षा कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य कार्यरत पेशेवरों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नेतृत्व और प्रबंधन कौशल प्रदान करना होगा। शुरुआती चरण सफल के बाद दूसरे चरण में नियमित डिग्री प्रदान करने वाले प्रबंधन पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु और सिंगहसारी विशेष आर्थिक क्षेत्र के प्रबंधन एवं विकास निकाय के बीच समझौता किया जाएगा।

यह परिसर मुख्य रूप से इंडोनेशियाई छात्रों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है, लेकिन इसके माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों के विद्यार्थियों और पेशेवरों को भी आकर्षित करने की योजना है। कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को बेंगलुरु स्थित संस्थान परिसर में अल्पकालिक शैक्षणिक भ्रमण का अवसर भी मिलेगा। इससे उन्हें भारत के नवाचार तंत्र, उद्योग जगत और कारोबारी वातावरण को निकट से समझने का अवसर प्राप्त होगा।

गौरतलब है कि इससे पहले आईआईएम अहमदाबाद ने दुबई में, आईआईटी दिल्ली ने अबू धाबी में और आईआईटी मद्रास ने जांजीबार में अपने अंतरराष्ट्रीय परिसरों की स्थापना कर भारत की शैक्षिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। अब भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु का इंडोनेशिया में विस्तार इस प्रयास को और मजबूती देगा। यह पहल भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भी दर्शाती है। साथ ही यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अब विश्व को गुणवत्तापूर्ण और किफायती शिक्षा उपलब्ध कराने वाले प्रमुख ज्ञान साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।

वहीं यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उस परिकल्पना को भी साकार करती है, जिसमें देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों को वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और विश्वस्तरीय शिक्षा तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि यह परिसर केवल इंडोनेशिया ही नहीं, बल्कि पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। प्रधानमंत्री ने यह घोषणा इंडोनेशिया की अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त वक्तव्य में की।

प्रस्तावित आईआईएम परिसर इंडोनेशिया के मलांग स्थित सिंगहसारी विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। इसे भारत की शिक्षा व्यवस्था के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय शिक्षा मॉडल की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ेगी और भारत की शैक्षिक साख को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। इंडोनेशिया परिसर का पाठ्यक्रम आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।

इसमें पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिनमें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं, डिजिटल परिवर्तन, एआई, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास व स्वास्थ्य प्रबंधन शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में उद्योग जगत के वरिष्ठ नेतृत्व, प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रमुख हस्तियों के साथ संवाद के अवसर भी उपलब्ध होंगे, जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल केवल एक शैक्षणिक परियोजना नहीं है, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच ज्ञान, कौशल विकास और मानव संसाधन निर्माण के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने वाला कदम है।

इससे इंडोनेशिया क्षेत्रीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन शिक्षा के केंद्र के रूप में उभर सकेगा, वहीं भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए शिक्षा, नेतृत्व विकास और नवाचार का विश्वसनीय साझेदार बनने की अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा। भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु का यह अंतरराष्ट्रीय परिसर भारत की बढ़ती शैक्षिक शक्ति, ज्ञान आधारित कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व की महत्वाकांक्षा का एक महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जा रहा है।

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Created On :   7 July 2026 2:53 PM IST

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