जम्मू-कश्मीर पुलिस ने किया 'पैडल थ्रू पैराडाइज' साइकिल रेस 2026 का आयोजन

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने किया पैडल थ्रू पैराडाइज साइकिल रेस 2026 का आयोजन
जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा डल झील से हरवान मार्ग पर'पैडल थ्रू पैराडाइज साइकिल रेस 2026' का आयोजन किया गया। इस रेस को पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (सशस्त्र) नितेश कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

श्रीनगर, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा डल झील से हरवान मार्ग पर'पैडल थ्रू पैराडाइज साइकिल रेस 2026' का आयोजन किया गया। इस रेस को पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (सशस्त्र) नितेश कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

खेल, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 3,000 साइकिल चालकों ने हिस्सा लिया। रेस में हिस्सा लेने वाले उमर हसन ने 'आईएएनएस' के साथ बात करते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के द्वारा आयोजित की गई इस रेस में अलग-अलग पेशे के लोग शामिल हुए। उन्होंने बताया कि इस रेस में बड़े से लेकर बच्चों तक ने भाग लिया और हर कोई काफी उत्साहित था।

उमर ने बताया कि वह नियमित तौर पर साइकिलिंग करते हैं और इस रेस में उन्होंने इसलिए हिस्सा लिया ताकि वह अपना स्टैमिना बढ़ाकर आगे साइकिलिंग में करियर बनाने की सोच सकें। उन्होंने कहा, "कोई भी गतिविधि, चाहे वह शारीरिक हो या कोई अन्य खेल, बहुत अच्छी चीज है। यह इंसान को बाकी कामों से दूर रखती है। हमने अपने काम और व्यस्त दिनचर्या को एक तरफ रख दिया था और पिछले एक-दो दिनों से तैयारियों में लगे हुए थे।"

वहीं, 'पेडल पुशर' ग्रुप के सदस्य साहिद राही ने बताया कि उनका पूरा ग्रुप में इस रेस में हिस्सा लेने के लिए आया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की रेस का आयोजन जम्मू-कश्मीर में होना चाहिए, इसकी मदद से जो लोग अवसाद, स्ट्रेस या ड्रग्स का शिकार हैं उन्हें बोस्ट मिलेगा। साहिद ने कहा कि रेस में हिस्सा लेने से ऐसे लोगों का माइंडसेट पूरी तरह से बदल सकता है। मोहम्मद रफान ने बताया कि वह इस रेस में स्टैमिना बढ़ाने और ड्रग्स से दूर रहने के लिए शामिल हुए। उन्होंने सरकार से भी अपील की और ऐसी रेस का लगातार आयोजन करने को कहा।

रेस में हिस्सा लेने वाले जुल्फिकार अली ने कहा कि इस तरह की रेस युवाओं के लिए अपनी शारीरिक ताकत को साबित करने के लिए अच्छा प्लेटफॉर्म है। उन्होंने कहा कि इस तरह की रेस के आयोजन छोटे बच्चों की सोच पर बहुत बड़ा फर्क डाल सकती है। जुल्फिकार ने कहा कि इस तरह की रेस को देखकर बच्चे सोचने पर मजबूर होंगे कि इसमें कुछ तो खास है तभी पुलिस और सरकार इसका आयोजन कर रही है और वह भविष्य में साइकिलिंग रेसिंग या अन्य चीजों में करियर बनाने की सोचेंगे।

इस रेस में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रेस में भाग लेने वालीं ईशा बशीर ने युवाओं को मैसेज देते हुए कहा कि अगर हम इन तरह की रेसों में भाग ले सकते हैं, तो जम्मू-कश्मीर के युवा क्यों नहीं और वह ड्रग्स की लत में क्यों पड़े हुए हैं। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वह इस तरह के इवेंट्स में अगर हिस्सा लेंगे, तो वो खुद-ब-खुद नशे से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि खेल एक खूबसूरत चीज है। यह भी एक तरह की लत है लेकिन सकारात्मक रूप में है। ईशा ने कहा कि अगर इस तरह की रेसों का आयोजन होता रहेगा, तो युवा ड्रग्स और इन तरह की तमाम चीजों से दूर रहेंगे।

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