यादों में असद 'मुझको मेरे बाद जमाना ढूंढेगा' लिखने वाले गीतकार, हिंदी सिनेमा के लिए रचे अमर गीत
मुंबई, 9 जुलाई (आईएएनएस)। बॉलीवुड फिल्मों को नए आयाम देने में गीतकारों और शायरों का बहुत बड़ा रोल रहा है, जिन्होंने फिल्मों में ऐसे सदाबहार गाने दिए, जो आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं। उन्हीं मशहूर, दिग्गज शायर और गीतकार में एक नाम असद भोपाली का भी है।
असद भोपाली का जन्म 10 जुलाई 1921 को मध्य-प्रदेश के भोपाल जिले में हुआ था। उनका असली नाम असदुल्ला खान था। उनके पिता मुंशी अहमद खान अरबी और फारसी के शिक्षक थे। अपने पिता के मार्गदर्शन में ही असद ने अरबी, फारसी, उर्दू और अंग्रेजी में शिक्षा प्राप्त की।
असद को बचपन से ही शायरी और लेखनी में काफी रुचि थी। अपनी इसी कला के बलबूते उन्होंने आजादी की लड़ाई में भागीदारी दर्ज कराई और कई क्रांतिकारी लेखनी के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। वहीं, 28 वर्ष की उम्र में असद अपनी कला को निखारने और नया मुकाम हासिल करने के लिए मुंबई आ गए। हालांकि, करियर के शुरुआती दौर में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन वह अपनी काबिलियत का हाथ पकड़े हुए आगे बढ़ते गए।
असद भोपाली को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पहला ब्रेक 1949 में फिल्म 'दुनिया' से मिला था। इस मूवी में उन्होंने दो गाने, 'दिल टूट गया' और 'रोना है तो रो, चुपके-चुपके,' लिखे। हालांकि, उन्हें असल पहचान 1951 में बीआर चोपड़ा की आई फिल्म 'अफसाना' से मिला। इस फिल्म के सभी गाने असद भोपाली ने लिखे, जिसमें उनकी शायरी और गीतों को काफी पसंद किया गया। उन गानों में 'दुनिया एक कहानी रे भैया', 'किस्मत बिगड़ी दुनिया बदली', 'आज कुछ ऐसी चोट लगी है', 'वो पास भी रहकर पास नहीं' और 'चोपाटी पे कल जो तुझसे' शामिल हैं।
असद भोपाली ने अपनी अनूठी लिखने की कला और शानदार शायरी के दम पर लगभग 40 वर्षों तक 100 से अधिक फिल्मों में 400 से अधिक गाने लिखे। अपने लगभग चार दशक के लंबे करियर में असद भोपाली ने कुछ ऐसे सदाबहार गीत लिखे, जिसने उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार दिलाए। उन्हीं में एक सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार है, जो उन्हें 'मैंने प्यार किया' फिल्म के मशहूर गीत 'दिल दीवाना बिन सजना के' के लिए दिया गया।
असद भोपाली के सबसे लोकप्रिय गीतों की बात करें, तो उसमें 'कबूतर जा जा जा', 'मेरे रंग में रंगने वाली', 'दिल का सूना साज तराना ढूंढेगा', 'हम तुमसे जुदा होके मर जाएंगे', 'अजनबी तुम जाने पहचाने से लगते हो', 'मेरे दिल की आग बंटेंगी दुनिया के परवानों में' आदि शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने कई मशहूर शायरी और कविताएं भी लिखी।
अपने जीवन के अंतिम दौर में असद भोपाली को पैरालाइसिस का दौरा आया, जिससे उनका स्वास्थ्य काफी बिगड़ गया और वह अपने परिवार के साथ भोपाल लौट आए। वहीं, 9 जून 1990 को उनका निधन हो गया, लेकिन अपनी शानदार लेखनी के कारण वह सदा के लिए अमर हो गए।
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Created On :   9 July 2026 8:03 PM IST












