झारखंड जेलों में डॉक्टरों की भारी कमी पर हाईकोर्ट ने लिया स्वत संज्ञान, मामला चीफ जस्टिस को भेजा
रांची, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में चिकित्सकों की गंभीर कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है।
जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे आगे की सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस के समक्ष रखने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने पेश आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता उजागर कर दी। राज्य की जेलों में चिकित्सकों के कुल 43 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से केवल एक पद पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 42 पद रिक्त पड़े हैं।
अदालत ने इसे अत्यंत चिंताजनक बताते हुए जेलों में कैदियों के स्वास्थ्य अधिकार के उल्लंघन की ओर संकेत किया। इसके साथ ही जेलों में मेडिकल सुविधाओं की आधारभूत संरचना में भी भारी कमी की बात सामने आई।
दरअसल, यह मुद्दा एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान उठा। मामले में प्रार्थी ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर अपनी किडनी खराब होने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की थी। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल किए जाने से पहले ही प्रार्थी की मौत हो गई।
मृतक के परिजनों ने अदालत से मुआवजे की मांग की, जिसपर कोर्ट ने उन्हें इस संबंध में अलग से याचिका दाखिल करने की अनुमति दी है। सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर स्वत: संज्ञान लिया।
कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जेलों में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की नियुक्ति सुनिश्चित करे और आवश्यक मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराए। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार से इस संबंध में विस्तृत जवाब तलब किया जा सकता है।
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Created On :   30 April 2026 7:49 PM IST












