जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के मुद्दे पर हाई कोर्ट में बहस, सरकार बोली- सिस्टमैटिक फेलियर हुआ है, अदालत ने पूछा- जांच पूरी क्यों नहीं हुई
रांची, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बुधवार को झारखंड हाई कोर्ट में लंबी सुनवाई हुई। सरकार ने अदालत में अब तक की जांच पर सीलबंद रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि परीक्षा में ‘सिस्टमैटिक फेलियर’ और बड़े पैमाने पर अनियमितता की बात सामने आई है। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने पूरी परीक्षा रद्द करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच में अभी तक ऐसा कोई आधार सामने नहीं आया है जिससे सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी माना जा सके।
अदालत ने सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी। अब गुरुवार को सुबह 11 बजे मामले पर फिर सुनवाई होगी। राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले को उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली के तथ्य सामने आए हैं और अनुसंधान में इसकी पुष्टि हो रही है। अदालत को बताया गया कि मामले में अब तक 28 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अनुसंधान आगे बढ़ने के साथ यह संख्या बढ़ सकती है।
सरकार की ओर से बताया गया कि इस मामले में आगे जांच जारी है, जिस पर कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि यदि आपकी जांच तीन साल तक चलेगी तो कोर्ट इंतजार नहीं करता रहेगा। सरकार की दलीलों के दौरान अदालत ने मामले में सफल हुए करीब 2,700 अभ्यर्थियों के साथ न्याय किए जाने की जरूरत पर सवाल किया। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी ने योग्यता के आधार पर नियुक्ति हासिल की है तो उसे व्यापक अनियमितता के आधार पर प्रभावित करने से पहले संबंधित पहलुओं पर विचार जरूरी है।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार पूरी परीक्षा व्यवस्था में ‘सिस्टमैटिक फेलियर’ की बात कर रही है तो इस पहलू की गंभीरता से जांच किए बिना आगे कैसे बढ़ा जा सकता है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन ने दलील दी कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के किसी केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने का प्रमाण नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि मामला संभावित प्रश्नों की जानकारी पहले से उपलब्ध होने से जुड़ा है।
उनके अनुसार नेपाल में 28 अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्नों की जानकारी दी गई थी, जिनमें 10 सफल हुए। इन 10 अभ्यर्थियों के परिणाम जारी नहीं करने का निर्देश पहले हाईकोर्ट ने दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि एसआईटी की जांच दो साल से अधिक समय से जारी है और अब तक आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ है। ऐसे में यह स्पष्ट हुए बिना कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष, पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं है।
एक अन्य पक्ष की ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले ही मामले में दिशा-निर्देश दे चुके हैं और दोषी तथा निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच अंतर किया जाना चाहिए।
बता दें कि सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त को जेएसएससी सीजीएल सहित 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का आदेश जारी किया था। सरकार के इस आदेश को कई अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है।
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Created On :   7 Oct 2026 5:33 PM IST












