लगातार दूसरे दिन बाजार में छाई लाली, सेंसेक्स 852 अंक फिसला, निफ्टी 0.84 प्रतिशत गिरा
मुंबई, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी नाकाबंदी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, कमजोर रुपए और अन्य प्रतिकूल कारकों के कारण भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी दिन बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख घरेलू बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 852.49 अंकों यानी 1.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,664 पर ट्रेड करते नजर आया, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 205.05 (0.84 प्रतिशत) अंक फिसलकर 24,173.05 पर पहुंच गया।
दिन के कारोबार में सेंसेक्स 77,983.66 पर खुलकर 823 अंक या 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 77,574.18 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। तो वहीं निफ्टी 24,202.35 पर खुलकर 243 अंक या करीब 1 प्रतिशत गिरकर 24,134.80 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।
इस तरह, महज दो सत्रों में सेंसेक्स करीब 1,600 अंक या 2 प्रतिशत तक गिर गया है, जबकि निफ्टी 50 में भी लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई है।
सत्र के दौरान, व्यापक बाजार सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई, जबकि पिछले सत्र में बाजार में गिरावट के बावजूद व्यापक सूचकांक हरे निशान में बंद हुए थे। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में जहां 0.67 प्रतिशत की गिरावट आई, वहीं निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी फार्मा (2.36 प्रतिशत की तेजी) और निफ्टी मीडिया (0.90 प्रतिशत की बढ़त) को छोड़कर अन्य सभी सेक्टर्स में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा निफ्टी ऑटो में 2.35 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 2.19 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 1.83 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.38 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 1.31 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 1.22 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
निफ्टी50 पैक में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला, अदाणी इंटरप्राइजेज, कोल इंडिया, अपोलो हॉस्पिटल, अदाणी पोर्ट्स, ओनजीसी और नेस्ले इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जबकि ट्रेंट, श्रीराम फाइनेंस, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, इंफोसिस, एसबीआई लाइफ, टीएमपीवी और एमएंडएम के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य की जारी नाकाबंदी के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों को सतर्क रखा, जिससे वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने का रुख देखने को मिला। अमेरिका-ईरान वार्ता के ठप होने के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर बनी रहने से बाजार का माहौल और भी निराशाजनक हो गया।
इस बीच, भारतीय रुपया लगातार चौथे सत्र में कमजोर होता चला गया और एक महीने में दूसरी बार 94 के स्तर को पार कर गया।
बाजार की चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड 1.1 प्रतिशत बढ़कर लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो लगातार चौथे दिन की बढ़त को दर्शाता है। इस साल अब तक बेंचमार्क में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें से अधिकांश तेजी मध्य पूर्व संघर्ष के बढ़ने के बाद हुई है।
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Created On :   23 April 2026 4:09 PM IST












