‘तंत्र विद्या’ पर आधारित शिवालय, जहां दिन में तीन बार बदलता शिवलिंग का रंग, खड़ी मुद्रा में विराजमान नंदी महाराज तो मेंढक की होती है पूजा

‘तंत्र विद्या’ पर आधारित शिवालय, जहां दिन में तीन बार बदलता शिवलिंग का रंग, खड़ी मुद्रा में विराजमान नंदी महाराज तो मेंढक की होती है पूजा
देश-दुनिया में महादेव के कई अद्भुत मंदिर स्थित हैं, जिनकी कथा से लेकर बनावट तक हैरत में डाल देती है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भी ऐसा ही एक शिवालय है, जो अपने अंदर कई हैरान कर देने वाली चीजों को समेटे हुए है। ‘तंत्र विद्या’ पर आधारित शिव मंदिर में मेंढक की पूजा होती है और यहां खड़ी मुद्रा में नंदी महाराज विराजमान हैं।

लखीमपुर खीरी, 13 मार्च (आईएएनएस)। देश-दुनिया में महादेव के कई अद्भुत मंदिर स्थित हैं, जिनकी कथा से लेकर बनावट तक हैरत में डाल देती है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भी ऐसा ही एक शिवालय है, जो अपने अंदर कई हैरान कर देने वाली चीजों को समेटे हुए है। ‘तंत्र विद्या’ पर आधारित शिव मंदिर में मेंढक की पूजा होती है और यहां खड़ी मुद्रा में नंदी महाराज विराजमान हैं।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, लखीमपुर खीरी जिले में स्थित मेंढक मंदिर या नर्मदेश्वर महादेव मंदिर मेंढक की विशाल आकृति पर बना है और यहां मेंढक की पूजा भी की जाती है। सबसे खास बात यह है कि भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज यहां बैठी मुद्रा में नहीं, बल्कि खड़ी मुद्रा में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि यह भारत में एकमात्र शिव मंदिर है, जहां नंदी खड़े होकर भोलेनाथ की सेवा कर रहे हैं। यह अद्भुत मंदिर ओयल कस्बे में स्थित है, जो लखीमपुर से सीतापुर जाने वाले मार्ग पर लगभग 12 किलोमीटर दूर है। इसे ‘मेंढक मंदिर’ या ‘मंडूक तंत्र मंदिर’ के नाम से जाना जाता है।

भगवान शिव को समर्पित है और ‘मंडूक तंत्र’ पर आधारित अपनी अनोखी तांत्रिक वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण 1860 से 1870 के बीच ओल राज्य के तत्कालीन राजा ने करवाया था। यह मंदिर 18 x 25 वर्ग मीटर के क्षेत्र में एक विशाल मेंढक की आकृति के पीछे बनाया गया है। मेंढक का चेहरा करीब 2 x 1.5 x 1 क्यूबिक मीटर का है और इसका मुंह उत्तर दिशा की ओर है। मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व में है, जबकि दूसरा द्वार दक्षिण दिशा में है। मेंढक की पीठ पर काफी ऊंचा अष्टकोणीय या आठ कोनों वाला चबूतरा बना है, जो श्री यंत्र की आकृति से मिलता-जुलता है। इस चबूतरे पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां बनी हैं।

सबसे ऊपर गर्भगृह है, जहां सफेद संगमरमर का लगभग तीन फीट ऊंचा अरघा स्थापित है। इस अरघे पर कई कमल की नक्काशी बनी है और इसी पर ‘नर्मदेश्वर शिवलिंग’ विराजमान है, जिसे ‘बानसुर प्रदरी नरमेश्वर नरदादा कंड’ से लाया गया था। गर्भगृह का द्वार भी पूर्व दिशा की ओर है और बाहर परिक्रमा पथ बना हुआ है। मंदिर की दीवारों पर सूक्ष्म नक्काशी और तांत्रिक चिह्न देखने लायक हैं।

यह शिवालय संतुलन, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र है। मेंढक को यहां जल तत्व और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए तांत्रिक परंपरा में मेंढक की पूजा विशेष महत्व रखती है। भक्त यहां शिवलिंग के साथ मेंढक की भी पूजा करते हैं और मानते हैं कि इससे जीवन में स्थिरता और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। लोकमान्यता के अनुसार, शिवलिंग का रंग दिन भर में तीन बार बदलता है।

नंदी की खड़ी मुद्रा इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है। सामान्य शिव मंदिरों में नंदी हमेशा बैठे हुए दिखते हैं, लेकिन यहां वह खड़े होकर भगवान शिव की रक्षा और सेवा करते प्रतीत होते हैं। यह अनोखी मूर्ति भक्तों को आश्चर्यचकित करती है और मंदिर की दिव्यता को भी बढ़ाती है। मेंढक मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि वास्तु और तंत्र विद्या के अध्ययन का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं और इसे ‘दिव्य अनुभूति का धाम’ कहते हैं।

ओयल पहुंचने के लिए लखीमपुर खीरी से बस या टैक्सी आसानी से उपलब्ध है। यदि ट्रेन या फ्लाइट से जाना चाहते हैं, तो निकटतम एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन लखनऊ है, जो लगभग 135 किलोमीटर दूर है। लखनऊ से लखीमपुर के लिए नियमित बसें चलती हैं।

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Created On :   13 March 2026 6:47 PM IST

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