ड्रोन से जुड़े उभरते खतरों और नागरिक उड्डयन सुरक्षा के महत्व के बारे में दी जानकारी

ड्रोन से जुड़े उभरते खतरों और नागरिक उड्डयन सुरक्षा के महत्व के बारे में दी जानकारी
लखनऊ हवाई अड्डे पर नागरिक उड्डयन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का आयोजन एएसजी लखनऊ द्वारा किया गया, जिसमें सीआईएसएफ कर्मियों को ड्रोन से जुड़े उभरते खतरों और नागरिक उड्डयन सुरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

लखनऊ, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। लखनऊ हवाई अड्डे पर नागरिक उड्डयन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का आयोजन एएसजी लखनऊ द्वारा किया गया, जिसमें सीआईएसएफ कर्मियों को ड्रोन से जुड़े उभरते खतरों और नागरिक उड्डयन सुरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना के अधिकारियों की भागीदारी रही और सत्र सीनियर कमांडेंट/सीएएसओ अनूप कुमार की उपस्थिति में संपन्न हुआ। सत्र का उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करना और हवाई खतरों से निपटने के लिए बेहतर तैयारियों पर जोर देना था।

इस सत्र में प्रतिभागियों को ड्रोन के बुनियादी उपयोग, उनके संचालन की जानकारी और हवाई खतरों से निपटने के तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया गया। साथ ही उन्हें उन्नत ड्रोन-रोधी तकनीकों और प्रणालियों से भी अवगत कराया गया, जो आधुनिक हवाई सुरक्षा तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ड्रोन-रोधी तकनीक का प्रशिक्षण सुरक्षा कर्मियों को वास्तविक समय में हवाई खतरों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

सत्र ने न केवल प्रतिभागियों की स्थिति की समझ को बढ़ाया, बल्कि उनके परिचालन कौशल और तत्परता को भी मजबूत किया। इससे नागरिक उड्डयन के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में सीआईएसएफ की प्रतिबद्धता और अधिक सुदृढ़ हुई है।

जागरुकता सत्र के माध्यम से यह संदेश भी स्पष्ट हुआ कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रशिक्षण और तकनीक का एक साथ होना आवश्यक है। अधिकारीयों ने बताया कि ऐसे सत्रों से सुरक्षा कर्मियों में न सिर्फ जागरूकता बढ़ती है, बल्कि उन्हें किसी भी संभावित खतरे का त्वरित और प्रभावी मुकाबला करने की क्षमता भी प्राप्त होती है।

बताया जा रहा है कि इस पहल से लखनऊ हवाईअड्डे की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और नागरिक उड्डयन क्षेत्र में किसी भी तरह के हवाई खतरों से निपटने की क्षमता को बढ़ाया जा सकेगा।

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Created On :   4 April 2026 5:48 PM IST

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