मदरसों पर तसलीमा नसरीन के बयान पर घमासान, भाजपा नेताओं का समर्थन तो मुस्लिम धर्मगुरुओं ने जताया विरोध
नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन के मदरसों और जिहाद को लेकर दिए गए बयान पर देश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने जहां उनके बयान को व्यक्तिगत राय बताते हुए विभिन्न पहलुओं पर प्रतिक्रियाएं दी, वहीं मुस्लिम धर्मगुरुओं ने ऐसे बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
दरअसल, तसलीमा नसरीन ने मदरसा शिक्षा को गैर-जरूरी बताते हुए दावा किया कि इससे सिर्फ जिहादी पैदा होते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि यह पूरी तरह उनका निजी बयान है। तसलीमा एक लेखिका हैं और समय-समय पर विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करती रहती हैं। ऐसे में उनके विचारों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने उत्तराखंड और असम का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। आज जरूरत तकनीकी और आधुनिक शिक्षा की है। राष्ट्रवादी मुसलमानों को समर्थन दिया जाना चाहिए और मदरसों को नियमित विद्यालयों में परिवर्तित किया जाना चाहिए, जहां उत्तर प्रदेश बोर्ड या केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दी जाए।
भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में परिवर्तन की लहर देखने को मिली है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ईमानदार शासन स्थापित हुआ है। तसलीमा ने भी यह बात कही है कि यह देखने की आवश्यकता है कि मदरसों से किस प्रकार के लोग निकल रहे हैं और मदरसों को बंद किया जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि यह केवल तसलीमा की आवाज नहीं है, बल्कि आने वाले समय में देशभर से इसी तरह की आवाजें उठेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसों से आतंकवादी निकलते हैं और इसलिए उन्हें पूरी तरह बंद कर दिया जाना चाहिए।
भाजपा सांसद समिक भट्टाचार्य ने भी इसे तसलीमा नसरीन की व्यक्तिगत राय बताया। उन्होंने कहा कि तसलीमा भारत की नागरिक नहीं हैं, लेकिन जो बातें वह आज कह रही हैं, वही बातें कभी पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने भी कही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि उस समय माकपा ने बुद्धदेव भट्टाचार्य की बात मानी होती तो आज पश्चिम बंगाल की स्थिति अलग होती।
समिक भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि बुद्धदेव भट्टाचार्य ने तसलीमा नसरीन के चर्चित उपन्यास 'लज्जा' पर प्रतिबंध लगाने की पूरी कोशिश की थी। उन्होंने कांग्रेस और वामपंथी दलों की विचारधारा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सोच हमेशा विरोधाभासी रही है। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार होने के कारण तसलीमा नसरीन भारत की धरती पर रह पा रही हैं और इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने तसलीमा के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश से आकर भारत के मदरसों पर इतने गंभीर आरोप लगाना बेहद दुखद है। जिसने भी इस तरह के बयान दिए हैं, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। देश के मदरसों में कुरान और हदीस की शिक्षा दी जाती है और इन दोनों का मूल संदेश इंसानियत, शांति और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना है। मदरसों को लेकर इस तरह के आरोप तथ्यहीन हैं और समाज में गलत संदेश फैलाने वाले हैं।
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :   3 Aug 2026 10:24 PM IST












