महाराष्ट्र स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 1 नवंबर तक का दिया अल्टीमेटम
मुंबई, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ोतरी को लेकर विरोध तेज हो गया है। एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स (एएसएमआई) से जुड़े इंटर्न डॉक्टरों ने गुरुवार को मुंबई के प्रसिद्ध जे.जे. अस्पताल में प्रदर्शन किया। डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि उनके मौजूदा मासिक स्टाइपेंड को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए।
प्रदर्शन कर रहे इंटर्न्स का कहना है कि दूसरे राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र में इंटर्न्स को मिलने वाला मानदेय काफी कम है। उत्तर प्रदेश, बिहार और कई अन्य राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को लगभग 25,000 या उससे अधिक का स्टाइपेंड दिया जा रहा है। जबकि मुंबई जैसे महानगर में रहने का खर्च बहुत अधिक है, इसके बावजूद यहां का स्टाइपेंड बेहद कम है, जो न्यायसंगत नहीं है।
इंटर्न डॉक्टरों ने बताया कि यह कोई नया मुद्दा नहीं है। वे पिछले कई महीनों से यह मामला मंत्री, राज्य प्रशासन, अस्पताल प्रशासन और डीन के सामने उठा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से जल्द से जल्द उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और ठोस निर्णय लेने का आग्रह किया है।
इस पूरे आंदोलन को लेकर एएसएमआई के महासचिव डॉ. रमन पवार ने विस्तार से बात की। उन्होंने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग, अस्पताल प्रशासन के साथ हुई बातचीत, राज्यव्यापी प्रदर्शन की रूपरेखा, आगे की रणनीति और ड्यूटी के घंटों को लेकर अपनी बात रखी।
डॉ. रमन पवार ने कहा, "यह मुद्दा आज का नहीं है, यह 2024 से चल रहा है। जब 2024 में इसको लेकर प्रदर्शन किया था, तब ही मांग की गई थी कि स्टाइपेंड 30,000 रुपये होना चाहिए, लेकिन सरकार ने उस समय कोई कदम नहीं उठाया। हम आज फिर उसी मांग को लेकर खड़े हैं।"
उन्होंने बताया, "अगस्त महीने में हमने सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री, प्रधान सचिव, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री और उनके प्रधान सचिव सहित सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र दिए। अगस्त से लेकर अक्टूबर तक हम लगातार पत्र सबमिट कर रहे हैं।"
डॉ. पवार ने आगे बताया, "सितंबर में हमने फिर से एक रिक्वेस्ट लेटर डाला और सरकार को 15 से 20 दिन का ग्रेस पीरियड दिया ताकि वे जवाब दे सकें, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। फिर 20 दिन बाद 5 अक्टूबर को हमने पुनर्विचार के लिए एक और पत्र डाला, जिसका पूरा प्रिंटआउट और रिसीव्ड कॉपी मेरे पास मौजूद है। उसके बाद भी हमने 10 दिन इंतजार किया, फिर भी कोई जवाब नहीं मिला।"
उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से मिलने की कोशिश की। दो बार मुलाकात भी हुई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। किसी भी बैठक की तारीख तय नहीं हुई और न ही कोई ठोस निर्णय लिया गया, जिसके कारण यह मामला अभी तक सुलझ नहीं पाया है।
डॉ. पवार ने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "यह विरोध प्रदर्शन पूरे महाराष्ट्र में हो रहा है। हम पूरे राज्य के इंटर्न्स इस आंदोलन में शामिल हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ मुंबई में प्रदर्शन चल रहा है।"
अस्पताल प्रशासन के स्तर पर हुई बातचीत को लेकर उन्होंने बताया, "पिछले तीन महीनों में हमने अपने डीन को तीन बार पत्र दिए हैं। डीन की तरफ से भी एक प्रस्ताव डीएमईआर को भेजा गया है। डीएमईआर को भी हमने पिछले तीन महीनों में लगभग छह पत्र दिए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिया है। सवाल यही है कि जब फाइल वित्त मंत्रालय तक पहुंच गई है, तो फिर अब तक निर्णय क्यों नहीं लिया गया? हमें और कितने दिन इंतजार करना पड़ेगा?"
डॉ. रमन पवार ने कहा, "आज हम साइलेंट प्रोटेस्ट कर रहे हैं। हमने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि अगर सरकार 1 नवंबर तक कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो 2 नवंबर से हम हड़ताल पर चले जाएंगे। हालांकि, इस दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।"
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :   22 Oct 2026 1:54 PM IST












