मेसी टूर मामला बंगाल के पूर्व खेल मंत्री को पुलिस ने भेजा तीसरा नोटिस

मेसी टूर मामला बंगाल के पूर्व खेल मंत्री को पुलिस ने भेजा तीसरा नोटिस
पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को पिछले साल 14 दिसंबर को हुए लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' इवेंट से जुड़े कथित कुप्रबंधन और वित्तीय गड़बड़ियों के सिलसिले में पुलिस ने एक बार फिर नोटिस भेजा है।

कोलकाता, 13 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को पिछले साल 14 दिसंबर को हुए लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' इवेंट से जुड़े कथित कुप्रबंधन और वित्तीय गड़बड़ियों के सिलसिले में पुलिस ने एक बार फिर नोटिस भेजा है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, "बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन ने शनिवार को एक नया नोटिस जारी किया है जिसमें बिस्वास को समन मिलने के 48 घंटे के अंदर पेश होने का आदेश दिया गया है। इस मामले में पूर्व मंत्री को दिया गया यह तीसरा नोटिस है। पुलिस के इस कदम के बाद अरूप बिस्वास कथित तौर पर छिप गए हैं।"

पुलिस सूत्रों ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेता बिस्वास ने पूर्व में भेजे गए नोटिस के बाद जांचकर्ताओं के सामने पेश नहीं हुए हैं। अब हमें नए नोटिस पर उनके जवाब का इंतजार है।

यह मामला 17 मई को मेसी के 'गोट इंडिया टूर' के मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता की शिकायत से शुरू हुआ है। बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन में दर्ज अपनी एफआईआर में, दत्ता ने बिस्वास पर कथित टिकट ब्लैक-मार्केटिंग, जबरन वसूली, धमकी, धोखाधड़ी और इवेंट की सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया। शिकायत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के कई नियमों के तहत दर्ज की गई थी।

एफआईआर के बाद, पुलिस ने शुरू में बिस्वास को 4 जून को जांचकर्ताओं के सामने पेश होने का निर्देश दिया। हालांकि, तय तारीख से पहले, पूर्व मंत्री ने पुलिस को बताया कि उन्हें सेहत से जुड़ी दिक्कतें हैं और वे कम से कम दो सप्ताह तक पेश नहीं हो पाएंगे।

जांचकर्ता इस बात से सहमत नहीं हुए और बाद में उन्हें 8 जून को सुबह 11 बजे तक पुलिस स्टेशन में पेश होने का निर्देश दिया। डेडलाइन से एक दिन पहले, पुलिस ने उनके दक्षिण कोलकाता वाले घर पर नोटिस चिपका दिया, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने अपनी बीमारी के दावे को साबित करने के लिए कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी है। निर्देश के बावजूद, बिस्वास 8 जून को जांचकर्ताओं के सामने पेश नहीं हुए। पुलिस सूत्रों ने कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने पुलिस को उनकी गैरमौजूदगी के बारे में आधिकारिक तौर पर बताया।

इस बीच, बिस्वास ने मामले में अग्रिम जमानत के लिए बारासात अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उनकी अर्जी खारिज कर दी गई। बाद में उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें जबरदस्ती की कार्रवाई से सुरक्षा मांगी गई। हाई कोर्ट ने उन्हें शर्तों के साथ राहत दी और पुलिस को उनकी पेशी के लिए 48 घंटे पहले नोटिस देने का निर्देश दिया।

अदालत ने जांच को बिना किसी रुकावट के जारी रखने की इजाजत दी, जबकि पुलिस को बिना सही प्रक्रिया का पालन किए गिरफ्तारी समेत जबरदस्ती के कदम उठाने से रोक दिया। कोर्ट ने बिस्वास को बिना पहले से इजाजत के पश्चिम बंगाल छोड़ने पर भी रोक लगा दी है। अब तीसरा समन जारी होने के साथ पूर्व मंत्री के अगले कदम का इंतजार है।

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Created On :   13 Jun 2026 6:11 PM IST

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