सेबी ने भारतीय शेयर बाजार को अमेरिका से अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया स्पेसएक्स शेयरों पर विशेषज्ञ

सेबी ने भारतीय शेयर बाजार को अमेरिका से अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया स्पेसएक्स शेयरों पर विशेषज्ञ
जेरोधा के संस्थापक नितिन कामथ और कैपिटलमाइंड म्यूचुअल फंड के सीईओ दीपक शेनॉय ने हाल ही में हुए स्पेसएक्स आईपीओ में शेयर पाने वाले निवेशकों पर अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी फिडेलिटी द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की ओर ध्यान दिलाया है और इस व्यवस्था की तुलना भारत के नियामकीय ढांचे से की है।

नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। जेरोधा के संस्थापक नितिन कामथ और कैपिटलमाइंड म्यूचुअल फंड के सीईओ दीपक शेनॉय ने हाल ही में हुए स्पेसएक्स आईपीओ में शेयर पाने वाले निवेशकों पर अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी फिडेलिटी द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की ओर ध्यान दिलाया है और इस व्यवस्था की तुलना भारत के नियामकीय ढांचे से की है।

फिडेलिटी की नीति के तहत, जिन निवेशकों को स्पेसएक्स आईपीओ में शेयर आवंटित हुए हैं, यदि वे शेयरों की लिस्टिंग के 15 कैलेंडर दिनों के भीतर उन्हें बेच देते हैं, जिसे 'फ्लिपिंग' कहा जाता है, तो उन्हें भविष्य में फिडेलिटी के माध्यम से आईपीओ आवंटन पाने का अधिकार खोना पड़ सकता है।

इस नीति पर प्रतिक्रिया देते हुए नितिन कामथ ने भारत के पूंजी बाजार और बाजार नियामक सेबी तथा स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा लागू सुरक्षा उपायों की सराहना की।

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "निश्चित रूप से अभी भी सुधार की गुंजाइश है, लेकिन यह देखकर हैरानी होती है कि सेबी और एक्सचेंजों की वजह से भारतीय बाजार अमेरिका की तुलना में कितने अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हैं।"

कामथ ने यह भी कहा कि केवल फिडेलिटी ही ऐसी शर्तें लागू नहीं करती, बल्कि अमेरिका की अन्य बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों में भी इसी तरह के प्रतिबंध देखने को मिलते हैं।

कैपिटलमाइंड के संस्थापक और पोर्टफोलियो प्रबंधक दीपक शेनॉय ने भी इस व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि भारत के नियामकीय ढांचे में ऐसी शर्तों को सही ठहराना मुश्किल होगा।

उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "यह कानूनी कैसे हो सकता है? सोचिए, कोई ब्रोकर आपसे कहे कि आईपीओ में मिले शेयरों को आप पहले 15 दिनों तक बेच नहीं सकते। भारत में सेबी ऐसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर देगी।"

ब्रोकरेज कंपनी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पहली बार नियम तोड़ने पर निवेशक को छह महीने तक नए इक्विटी ऑफर में भाग लेने से रोका जा सकता है। दूसरी बार उल्लंघन करने पर एक साल का प्रतिबंध लगाया जा सकता है, जबकि तीसरी बार ऐसा करने पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सकती है।

फिडेलिटी ने निवेशकों को भेजे अपने संदेश में कहा, "आईपीओ की लिस्टिंग के बाद 16वें कैलेंडर दिन से निवेशक अपने शेयर बेच सकते हैं और उन्हें फ्लिपर नहीं माना जाएगा।"

गौरतलब है कि शुक्रवार को नैस्डैक में लिस्टिंग के दौरान स्पेसएक्स के शेयरों में 19 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही कंपनी का बाजार मूल्य 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया, जिससे यह अमेरिका की छठी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई। इसी के साथ एलन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर (एक ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति वाले व्यक्ति) बन गए।

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Created On :   13 Jun 2026 6:32 PM IST

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