नागा शांति कार्यकर्ता निकेटु इरालू के निधन पर जेडडब्ल्यूए ने शोक व्यक्त किया

नागा शांति कार्यकर्ता निकेटु इरालू के निधन पर जेडडब्ल्यूए ने शोक व्यक्त किया
जेलियांगरोंग वेलफेयर एसोसिएशन (जेडडब्ल्यूए), दिल्ली ने अनुभवी नागा शांति कार्यकर्ता और सुलह-समझौते के पैरोकार निकेटु इरालू के निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। उनका निधन 18 अगस्त को नई दिल्ली में हुआ। उनके निधन पर नागालैंड और पूर्वोत्तर के विभिन्न संगठनों और लोगों ने शोक व्यक्त किया है।

नई दिल्ली/तामेंगलोंग, 21 अगस्त (आईएएनएस)। जेलियांगरोंग वेलफेयर एसोसिएशन (जेडडब्ल्यूए), दिल्ली ने अनुभवी नागा शांति कार्यकर्ता और सुलह-समझौते के पैरोकार निकेटु इरालू के निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। उनका निधन 18 अगस्त को नई दिल्ली में हुआ। उनके निधन पर नागालैंड और पूर्वोत्तर के विभिन्न संगठनों और लोगों ने शोक व्यक्त किया है।

जारी एक शोक संदेश में जेडडब्ल्यूए ने इरालू को नागा लोगों और पूरे पूर्वोत्तर के लिए एक "नैतिक मार्गदर्शक" बताया और शांति, आपसी समझ और सुलह के लिए उनकी छह दशकों से अधिक की समर्पित सेवा को याद किया। एसोसिएशन ने 'फोरम फॉर नागा रिकॉन्सिलिएशन' (एफएनआर), 'इनिशिएटिव्स ऑफ चेंज' और उनके प्रिय 'केरुन्यू की' (हाउस ऑफ लिसनिंग) के माध्यम से बातचीत और सुलह को बढ़ावा देने में उनकी अहम भूमिका को रेखांकित किया। इन मंचों के जरिए इरालू ने राजनीतिक, सामाजिक और जातीय मतभेदों को दूर करने का काम किया और लोगों को बातचीत, सहानुभूति, क्षमा और आपसी समझ को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

जेडडब्ल्यूए ने कहा कि इरालू के निधन से सद्भाव और एकता की सामूहिक यात्रा में एक बड़ी कमी आ गई है। संगठन ने उनके विनम्र स्वभाव, बुद्धिमानी और मानवता के प्रति निस्वार्थ समर्पण को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनकी विरासत शांति और मेल-मिलाप के लिए काम करने वालों को प्रेरित करती रहेगी। एसोसिएशन ने उनकी पत्नी क्रिस्टीन इरालू, परिवार के सदस्यों, दोस्तों और उन सभी लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की, जिन्हें उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा मिली थी। उन्होंने प्रार्थना की कि सर्वशक्तिमान ईश्वर शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में शक्ति, सांत्वना और हिम्मत प्रदान करें।

इरालू को बहुत से लोग प्यार से "अंकल निकेटू" कहते थे। उन्होंने नागालैंड और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति और आपसी विश्वास कायम करने के लिए कई दशक समर्पित किए। उनका घर, 'केरुन्यू की', एक ऐसी जगह बन गया था, जहां अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक साथ आ सकते थे, एक-दूसरे की बात सुन सकते थे और आपसी समझ विकसित कर सकते थे। वे एफएनआर से भी जुड़े थे और 'नागा रिकॉन्सिलिएशन कमीशन' (नागा मेल-मिलाप आयोग) के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने सेवा की थी। शांति-निर्माण और सामाजिक सद्भाव में उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले, जिनमें 2019 में 'डिस्टिंग्विश्ड सीनियर सिटिजन्स अवॉर्ड', 2023 में 'डॉ. भूपेन हजारिका इंटीग्रेशन अवॉर्ड' और 2025 में 'इनिशिएटिव्स ऑफ चेंज इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवर अवॉर्ड' शामिल हैं।

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Created On :   21 Aug 2026 10:53 AM IST

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