एनजीटी ने एमसीडी को गाजीपुर लैंडफिल के लिए समय-सीमा वाला प्लान जमा करने का निर्देश दिया

एनजीटी ने एमसीडी को गाजीपुर लैंडफिल के लिए समय-सीमा वाला प्लान जमा करने का निर्देश दिया
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को गाजीपुर लैंडफिल साइट पर जमा पुराने कचरे को हटाने और रोजाना आने वाले कचरे के सही प्रबंधन के लिए एक तय समय-सीमा वाला एक्शन प्लान पेश करने का निर्देश दिया है।

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को गाजीपुर लैंडफिल साइट पर जमा पुराने कचरे को हटाने और रोजाना आने वाले कचरे के सही प्रबंधन के लिए एक तय समय-सीमा वाला एक्शन प्लान पेश करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने दिया। उन्होंने एससीडी को कोर्ट कमिश्नर की स्टेटस रिपोर्ट में बताए गए तथ्यों की जांच करने के लिए चार हफ्ते का समय भी दिया है।

यह मामला अपने आप (स्वतः संज्ञान) लिया गया था। इसकी शुरुआत एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर हुई, जिसमें गाजीपुर लैंडफिल साइट पर बार-बार लगने वाली आग और उससे फैलने वाले धुएं से जुड़ी पर्यावरणीय समस्याओं को उजागर किया गया था।

ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि एमसीडी को यह भी बताना होगा कि वह वहां जमा कचरे को कैसे हटाएगा और रोजाना आने वाले कचरे का कैसे निपटान करेगा, वह भी एक तय समय-सीमा के साथ।

इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। एनजीटी अप्रैल 2024 से गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कचरे के खराब प्रबंधन के मामले पर नजर रख रहा है। उसी समय वहां आग लगने की एक बड़ी घटना हुई थी, जिससे आसपास के इलाकों में धुआं फैल गया था और लोगों के स्वास्थ्य व पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ गई थी।

इससे पहले मार्च 2025 में एमसीडी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्टों में अंतर पाए जाने के बाद एनजीटी ने जमीनी स्थिति की जांच के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था।

जांच रिपोर्ट में कोर्ट कमिश्नर ने कई गंभीर कमियां बताई थीं। इनमें लैंडफिल की ऊंचाई तय सीमा से ज्यादा होना, बाउंड्री वॉल न होने के कारण कचरे का पास के नालों में फैलना, और लीचेट (कचरे से निकलने वाला गंदा पानी) के सही प्रबंधन की कमी शामिल है, जिससे यमुना में जाने वाले नालों का पानी भी प्रदूषित हो रहा है।

इन कमियों को देखते हुए ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पहले ही एमसीडी को निर्देश दिया था कि वह कचरे के प्रोसेसिंग, पुराने कचरे की बायोमाइनिंग और आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए एक ठोस और समयबद्ध योजना तैयार करे।

इसके बाद अक्टूबर 2025 में एनजीटी ने वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के उपयोग और उससे बनने वाली बिजली की मात्रा के बारे में भी जानकारी मांगी थी। साथ ही, यह भी देखा जा रहा था कि संबंधित अधिकारी नियमों का सही तरीके से पालन कर रहे हैं या नहीं।

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Created On :   9 April 2026 10:30 PM IST

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