नोएडा में मजदूरों की हिरासत मामला, जॉन ब्रिटास ने पुलिस आयुक्त को लिखा पत्र

नोएडा में मजदूरों की हिरासत मामला, जॉन ब्रिटास ने पुलिस आयुक्त को लिखा पत्र
सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने गौतम बुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह को पत्र लिखकर नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिकों के प्रदर्शन के बाद बड़े पैमाने पर की गई गिरफ्तारियों और हिरासत पर गंभीर चिंता जताई है।

नोएडा, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने गौतम बुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह को पत्र लिखकर नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिकों के प्रदर्शन के बाद बड़े पैमाने पर की गई गिरफ्तारियों और हिरासत पर गंभीर चिंता जताई है।

राज्यसभा सांसद और सीपीआई(एम) संसदीय दल के नेता ब्रिटास ने अपने पत्र में कहा कि 17 अप्रैल को हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद उन्हें एक फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट मिली है, जिसमें दावा किया गया है कि 13 से 17 अप्रैल के बीच बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें मजदूर, महिलाएं और नाबालिग भी शामिल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 350 नाबालिग और लगभग 800 वयस्कों को कासना क्षेत्र में हिरासत में रखा गया है और कई परिवारों को अपने परिजनों की स्थिति या स्थान की जानकारी नहीं दी गई है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में लोगों को कार्यस्थलों से बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया गया और उन्हें गिरफ्तारी के कारण या एफआईआर की प्रति समय पर नहीं दी गई, जिससे उनके कानूनी अधिकार प्रभावित हुए हैं।

ब्रिटास ने यह भी चिंता जताई कि सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू) के नोएडा और भंगेल स्थित कार्यालयों को सील कर दिया गया है और कई ट्रेड यूनियन नेताओं को घर में नजरबंद किया गया है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस कार्रवाई कानून, समानुपातिकता और पारदर्शिता के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की मनमानी कार्रवाई से नागरिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है और औद्योगिक माहौल खराब हो सकता है।

सांसद ने पुलिस आयुक्त से तत्काल कई कदम उठाने की मांग की है, जिनमें हिरासत और गिरफ्तारी की समीक्षा, बिना ठोस आधार के हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई, कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना, और ट्रेड यूनियन कार्यालयों पर लगे प्रतिबंध हटाना शामिल है।

उन्होंने यह भी कहा कि सभी हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता और दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं तथा पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे नियमों का सख्ती से पालन करें।

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Created On :   20 April 2026 8:09 PM IST

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