न्याय सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं, नागरिकों को अधिकारों के प्रति सशक्त बनाना लक्ष्य अर्जुन राम मेघवाल

न्याय सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं, नागरिकों को अधिकारों के प्रति सशक्त बनाना लक्ष्य अर्जुन राम मेघवाल
कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने सोमवार को दक्षिण गोवा स्थित इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईयूएल्स) में दिशा 2.0 योजना के तहत एक रीजनल वर्कशॉप का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल और आईआईयूएल्स गोवा के वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) आर वेंकटा राव उपस्थित रहे।

दक्षिण गोवा, 21 सितंबर (आईएएनएस)। कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने सोमवार को दक्षिण गोवा स्थित इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईयूएल्स) में दिशा 2.0 योजना के तहत एक रीजनल वर्कशॉप का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल और आईआईयूएल्स गोवा के वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) आर वेंकटा राव उपस्थित रहे।

वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य नागरिकों तक कानूनी जानकारी, सलाह और सहायता पहुंचाने के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित और समुदाय-आधारित प्रयासों को मजबूत करना था। कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों, विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर्स और पैनल वकीलों ने अपने जमीनी अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे दिशा योजना ग्रामीण भारत में न्याय की पहुंच को आसान बना रही है।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि गोवा में आयोजित इस रीजनल वर्कशॉप का मकसद दिशा स्कीम के तीन प्रमुख स्तंभों- टेली-लॉ, न्याय बंधु और प्रो-बोनो (मुफ्त) कानूनी सेवाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।

उन्होंने कहा कि इस पहल से उन ग्रामीण निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा जो आर्थिक कारणों से कानूनी प्रतिनिधित्व का खर्च नहीं उठा सकते। इस योजना के तहत वकील स्थानीय निकायों और कॉमन सर्विस सेंटर्स के जरिए जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाएंगे। कार्यक्रम में न्याय तक पहुंच बढ़ाने में प्रो-बोनो क्लबों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं से लोगों को कानूनी जानकारी तो मिलेगी ही। साथ ही वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक भी होंगे।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय तक पहुंच सिर्फ अदालतों और कानूनी प्रक्रियाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देकर सशक्त बनाना और यह सुनिश्चित करना भी शामिल है कि कानूनी जानकारी और सेवाएं सरल, सुलभ और जवाबदेह हों।

'प्रो बोनो' के महत्व को बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक अलीपुर बम कांड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में चित्तरंजन दास ने निस्वार्थ भाव से अरविंद घोष का बचाव किया और न्याय के लिए जोरदार दलीलें दीं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें बरी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सेवा की यही भावना आज 'न्याय बंधु' पहल के माध्यम से जारी है और प्रो-बोनो वकील वास्तव में न्याय के संरक्षक हैं।

उन्होंने "न्याय प्रबोध: अवेकनिंग टू जस्टिस" के तहत चलाई जा रही कानूनी जागरूकता पहलों के महत्व पर भी जोर दिया, विशेष रूप से कानूनी साक्षरता और सेवा की संस्कृति को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों, छात्रों और युवा पेशेवरों को शामिल करने के संदर्भ में।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इंदौर में राहुल गांधी के एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इसे सिर्फ मिमिक्री का एक्ट बता रही है, लेकिन राहुल गांधी ने कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' के माध्यम से भारतीय संस्कृति का अपमान किया है।

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Created On :   21 Sept 2026 7:02 PM IST

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