ओडिशा में ड्यूटी से गायब डॉक्टरों पर सख्ती, 128 मेडिकल अधिकारियों के खिलाफ होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

ओडिशा में ड्यूटी से गायब डॉक्टरों पर सख्ती, 128 मेडिकल अधिकारियों के खिलाफ होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
ओडिशा सरकार ने लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात उन मेडिकल अधिकारियों और डेंटल सर्जनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जो वर्षों से बिना अनुमति ड्यूटी से गायब हैं।

भुवनेश्वर, 18 जून (आईएएनएस)। ओडिशा सरकार ने लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात उन मेडिकल अधिकारियों और डेंटल सर्जनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जो वर्षों से बिना अनुमति ड्यूटी से गायब हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में नियुक्त 128 मेडिकल ऑफिसर और डेंटल सर्जन पिछले पांच वर्ष या उससे अधिक समय से सेवा से अनुपस्थित हैं। इन अधिकारियों की स्थिति स्पष्ट करने और उन्हें जवाब देने का अवसर देने के लिए सरकार ने समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस भी प्रकाशित किए थे। इसके बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने और लंबे समय तक अनधिकृत अनुपस्थिति जारी रहने के कारण उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

सरकार का मानना है कि डॉक्टरों की अनुपस्थिति का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की देखभाल पर पड़ता है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में चिकित्सकों की कमी से लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होती है।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने एक अलग मामले में कंधमाल पुलिस अस्पताल की पूर्व मेडिकल ऑफिसर डॉ. बिचक्षणा पाणिग्रही को सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का आदेश भी दिया है। अधिकारियों के अनुसार, डॉ. पाणिग्रही वर्ष 2012 से बिना अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित थीं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा उन्हें कई बार नोटिस जारी कर अनुपस्थिति का कारण बताने और पुनः कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए, लेकिन उन्होंने किसी भी नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

सरकार ने कहा कि मरीजों के प्रति जिम्मेदारियों की अनदेखी और लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उनके खिलाफ यह कठोर कदम उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नए अस्पतालों का निर्माण, मौजूदा चिकित्सा संस्थानों का आधुनिकीकरण और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है, तब डॉक्टरों का लंबे समय तक ड्यूटी से गायब रहना गंभीर चिंता का विषय है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनसेवा से जुड़े किसी भी कर्मचारी की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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Created On :   18 Jun 2026 11:26 PM IST

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