ऑपरेशन डिजिटल कवच निजी तस्वीरें या वीडियो लीक होने पर घबराएं नहीं, तुरंत करें शिकायत, लखनऊ पुलिस की अपील

लखनऊ, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। डिजिटल युग में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए लखनऊ पुलिस ने 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' के तहत नागरिकों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि उनकी निजी तस्वीरें या वीडियो बिना सहमति के सोशल मीडिया या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साझा किए जाते हैं, वायरल किए जाते हैं या उनके जरिए ब्लैकमेल किया जाता है, तो घबराने या चुप रहने के बजाय तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस के अनुसार, निजी फोटो या वीडियो लीक होने के मामलों में कई पीड़ित सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक प्रतिक्रिया और बदनामी के डर से शिकायत नहीं करते। इसी वजह से अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। लखनऊ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाओं के लिए पीड़ित खुद को दोषी न मानें और कानूनी मदद लेने में संकोच न करें।
लखनऊ पुलिस ने पीड़ितों को सबसे पहले डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने की सलाह दी है। संबंधित पोस्ट, यूआरएल, प्रोफाइल लिंक, स्क्रीनशॉट, चैट और धमकी भरे संदेशों को सुरक्षित रखें, लेकिन सामग्री को आगे साझा न करें।
पुलिस ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति तस्वीरें या वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे या अन्य मांग करता है तो उसके दबाव में न आएं। ऐसे मामलों की तत्काल पुलिस को सूचना दें।
इसके अलावा, संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, वीडियो या अकाउंट को रिपोर्ट कर सामग्री हटाने का अनुरोध करें और निकटतम पुलिस थाने या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर अपराध की शिकायत के लिए केंद्र सरकार का नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) उपलब्ध है। पीड़ित ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के बाद मिलने वाले संदर्भ नंबर को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है, ताकि शिकायत की स्थिति पर नजर रखी जा सके।
पुलिस ने बताया कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े कुछ मामलों में एनसीआरपी पोर्टल पर पहचान उजागर किए बिना प्रारंभिक सूचना दी जा सकती है। हालांकि, सभी प्रकार के साइबर अपराधों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
लखनऊ पुलिस ने पीड़ितों को स्टॉपएनसीआईआई.ओआरजी के उपयोग की जानकारी भी दी है। यह एक निःशुल्क ऑनलाइन टूल है, जो बिना सहमति साझा की गई निजी तस्वीरों और वीडियो के ऑनलाइन प्रसार को रोकने में मदद करता है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह सेवा पुलिस शिकायत का विकल्प नहीं है, बल्कि सामग्री के प्रसार को रोकने का एक अतिरिक्त माध्यम है।
लखनऊ पुलिस के अनुसार, निजी तस्वीरें या वीडियो लीक करने, प्रसारित करने या उनसे ब्लैकमेल करने वालों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
मामले की प्रकृति के अनुसार दोषियों को कारावास और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। ब्लैकमेलिंग, धमकी, पीछा करने या जबरन वसूली जैसे मामलों में अतिरिक्त धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।
अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरण यादव ने कहा कि यदि किसी की निजी तस्वीरें या वीडियो बिना सहमति के वायरल किए जाते हैं या उनके माध्यम से ब्लैकमेल किया जाता है, तो डरें नहीं और चुप न रहें। यह पीड़ित की गलती नहीं है और कानून ऐसे मामलों में सहायता और सुरक्षा प्रदान करता है। पुलिस ने नागरिकों से साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूक और सतर्क रहने की अपील की है।
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