पैरा-खेलों की सफलता से सामान्य एथलीट्स को बेहतर करने की प्रेरणा मिल रही है कोच सत्यनारायण

पैरा-खेलों की सफलता से सामान्य एथलीट्स को बेहतर करने की प्रेरणा मिल रही है कोच सत्यनारायण
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 100 मीटर टी47 में भारत के गोल्ड और सिल्वर जीतने के बाद पैरा-एथलेटिक्स कोच सत्यनारायण शिमोगा ने कहा कि पैरा खेलों की सफलता से सामान्य एथलीट्स को भी विश्व स्तर पर मेडल जीतने की प्रेरणा मिल रही है।

ग्लासगो, 30 जुलाई (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 100 मीटर टी47 में भारत के गोल्ड और सिल्वर जीतने के बाद पैरा-एथलेटिक्स कोच सत्यनारायण शिमोगा ने कहा कि पैरा खेलों की सफलता से सामान्य एथलीट्स को भी विश्व स्तर पर मेडल जीतने की प्रेरणा मिल रही है।

भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा-एथलेटिक्स प्रतियोगिता में यादगार फिनिश किया। दिलीप महादू गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि हमवतन मोहम्मद बासिल मोरसिंगनाकाथी ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत का दबदबा कायम रखते हुए दूसरा स्थान हासिल किया।

सत्यनारायण ने 'आईएएनएस' को बताया, "पैरा खेलों की सफलता से सामान्य एथलीट भी यह मानने लगे हैं कि वे मेडल जीत सकते हैं। हम हमेशा अपने एथलीट से कहते हैं कि कड़ी मेहनत करें, और अच्छे नतीजे मिलेंगे। आज, भारत पैरा खेलों में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।"

सत्यनारायण ने यह भी बताया कि उन्होंने 400 मीटर की रेस में हिस्सा लेते आए दिलीप को 100 मीटर की रेस में आने के लिए कहा, जिसका उन्हें फायदा भी मिला। कोच ने कहा, "मुझे उम्मीद थी कि दिलीप और बासिल पहले और दूसरे नंबर पर आएंगे, और ठीक वैसा ही हुआ। दिलीप पहले 400 मीटर रेस में दौड़ते थे, लेकिन मैंने उसे 100 मीटर में शिफ्ट कर दिया। मैंने उन्हें दुबई भेजा, जहां उन्होंने सीडब्ल्यूजी के लिए क्वालीफाई किया।"

महाराष्ट्र के नासिक के पास तोरण डोंगरी के छोटे से गांव में जन्मे दिलीप की जिंदगी में तब बड़ा मोड़ आया, जब पांच-छह साल की उम्र में वह एक पेड़ से बुरी तरह गिर गए, जिससे उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट लग गई। समय पर मेडिकल इलाज न मिलने की वजह से, चोट अंगक्षय में बदल गई, जिससे कोहनी के नीचे से उसका हाथ काटना पड़ा।

इतने बड़े झटके के बावजूद, दिलीप ने अपनी स्थिति को अपने भविष्य पर हावी नहीं होने दिया, और पैरा-एथलेटिक्स में करियर बनाकर दौड़ने के अपने जुनून को पूरा किया। अपने गांव की धूल भरी सड़कों पर प्रैक्टिस करते हुए, उनके टैलेंट को बाद में कोच वैजनाथ काले ने पहचाना, जिन्होंने उन्हें प्रोफेशनल पैरा-एथलेटिक्स में गाइड किया। सत्यनारायण ने कहा, "अपनी जिंदगी में इतने बड़े झटके के बावजूद, भगवान ने उन्हें जिंदगी में कुछ बड़ा करने का रास्ता दिखाया और हम सभी ने उनका साथ दिया।"

दिलीप ने इससे पहले 2022 एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों के 400 मीटर टी47 इवेंट में गोल्ड जीता था, जो गेम्स में भारत का ऐतिहासिक 100वां मेडल रहा था। उन्होंने पेरिस 2024 पैरालंपिक में पुरुषों के 400 मीटर टी47 इवेंट के फाइनल में पहुंचकर देश को गर्व महसूस कराया था।

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Created On :   30 July 2026 3:27 PM IST

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